चलते-चलते-- डिमेंशिया का संकेत हो सकती है बदलती आवाज
- शोध में दावा- यह याददाश्त कम होने का शुरुआती संकेत - 50 साल

- आवाज से जुड़ी समस्या पर डिमेंशिया का खतरा 58 फीसदी ज्यादा
- सुनने में परेशानी है तो यह खतरा 27 फीसदी
वॉशिंगटन, एजेंसी। अगर किसी व्यक्ति की आवाज में लगातार बदलाव हो रहा है, बोलने या गाने में दर्द या परेशानी महसूस होती है तो इसे सिर्फ गले की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नए शोध का महत्व
एक नए शोध में सामने आया है कि आवाज से जुड़ी समस्याओं का संबंध डिमेंशिया और मानसिक क्षमता में गिरावट के बढ़ते खतरे से हो सकता है। डिमेंशिया ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने, निर्णय लेने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। अमेरिका में हुए इस शोध में 50 साल से ज्यादा उम्र के 8.33 लाख से अधिक लोगों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया।
आवाज की समस्या से जुड़ा खतरा
रिसर्च में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में आवाज की समस्या का संबंध डिमेंशिया के खतरे से सिर्फ सुनने की क्षमता कम होने की तुलना में ज्यादा मजबूत हो सकता है।
आवाज की समस्या वालों में 58 फीसदी ज्यादा खतरा
जिन लोगों को आवाज से जुड़ी समस्या थी, लेकिन सुनने में कोई परेशानी नहीं थी, उनमें उन लोगों की तुलना में डिमेंशिया होने का खतरा 58 फीसदी ज्यादा पाया गया जिन्हें ऐसी समस्या नहीं थी। सिर्फ सुनने की क्षमता में कमी वाले लोगों में यह खतरा करीब 27 फीसदी ज्यादा था। सबसे मजबूत संबंध उन लोगों में देखा गया, जिन्हें आवाज और सुनने दोनों से जुड़ी समस्याएं थीं।
सामाजिक गतिविधियों पर प्रभाव
आवाज की समस्या से गतिविधियां होती हैं कम
शोध के वरिष्ठ लेखक और ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट सैटलॉफ के मुताबिक, आवाज की समस्या होने पर व्यक्ति बातचीत कम कर देता है। ऐसी सामाजिक गतिविधियों से भी दूरी बना लेता है जो दिमाग को सक्रिय रखने में मदद करती हैं। उन्होंने बताया कि पार्किंसंस के मरीजों में भी कई बार आवाज से जुड़ी समस्याएं दूसरे लक्षण सामने आने से पहले दिखाई दे सकती हैं।
आवाज और मानसिक क्षमता का संबंध
विशेषज्ञों का कहना है कि आवाज और मानसिक क्षमता के बीच संबंध जैविक रूप से संभव है क्योंकि बोलने और सोचने की प्रक्रिया में दिमाग के कई हिस्से काम करते हैं। इन हिस्सों को आपस में तालमेल बैठाना जरूरी होता है। इसलिए बोलने के तरीके में बदलाव कुछ मामलों में दिमाग से जुड़ी शुरुआती समस्या की ओर संकेत कर सकता है। आवाज की समस्या सीधे न्यूरोलॉजिकल बदलाव से जुड़ी हो।
लक्षणों की पहचान
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- आवाज के उतार-चढ़ाव यानी पिच में बदलाव
- बोलने की स्पष्टता कम होना
- आवाज का बहुत धीमा या तेज हो जाना
- आवाज की सामान्य रेंज कम होना
- बोलते या गाते समय दर्द होना
क्या करें यदि आवाज में बदलाव हो
- आवाज में बदलाव सर्दी-जुकाम की वजह से भी आ सकता है।
- अगर लगातार परेशानी हो रही है तो डॉक्टर की सलाह लें।
- जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से आवाज की जांच करा सकते हैं।


