वायरल बुखार में धड़ल्ले से एंटीबायोटिक ले रहे मरीज, बिगड़ रहा हाजमा
गोरखपुर में मानसून के दौरान वायरल बुखार के मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लगभग 50 प्रतिशत मरीज बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लें रहे हैं, जिससे हाजमा खराब हो रहा है। कई मरीजों में त्वचा पर चकत्ते, उल्टी और अन्य समस्याएं देखी जा रही हैं।

गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता। मानसून में वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ने से अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बुखार होते ही करीब 50 प्रतिशत मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना शुरू कर दे रहे हैं। इससे उनका हाजमा खराब हो रहा है। कई मरीजों को त्वचा पर लाल चकत्ते, शरीर पर दाने और उल्टी की समस्या हो रही है। बीआरडी के मेडिसिन और बाल रोग विभाग की ओपीडी में बुखार के मरीजों की संख्या में करीब 30 से 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मेडिसिन विभाग के सभी बेड भरे हुए हैं। बाल रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले करीब 50 प्रतिशत बच्चे तेज बुखार से पीड़ित हैं।
डॉक्टरों की सलाह
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह ने बताया कि वायरल बुखार होते ही बहुत से लोग खुद से दवा लेना शुरू कर देते हैं। झोलाछाप भी मरीजों को एंटीबायोटिक दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्सीसाइक्लिन, एजिथ्रोमाइसिन और सेफिक्सिम जैसी एंटीबायोटिक का सेवन करने से शरीर पर इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है। ओपीडी में आने वाले कई मरीज ऐसे हैं जो पहले ही एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा कर चुके हैं। एंटीबायोटिक के ज्यादा सेवन से कुछ मरीजों की त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। कुछ को उल्टी और पेट से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी होने लगती हैं।
अनावश्यक सेवन के खतरे
मेडिसिन विभाग के डॉ नीरज चौधरी ने बताया कि वायरल बुखार में मरीज का पाचन तंत्र पहले से कमजोर हो जाता है। ऐसे में एंटीबायोटिक लेने पर हाजमा और बिगड़ सकता है। मरीज को बैक्टीरियल संक्रमण नहीं है तो वायरल बुखार के इलाज में एंटीबायोटिक की कोई भूमिका नहीं होती। लगातार या तेज बुखार होने पर मरीज को डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
रेजिस्टेंस का बढ़ रहा खतरा
बीआरडी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. राज किशोर सिंह ने बताया कि एंटीबायोटिक का बेतहाशा सेवन एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है। इसका मतलब है कि भविष्य में बैक्टीरियल संक्रमण होने पर सामान्य दवाएं असर करना कम कर सकती हैं। भविष्य में इलाज कठिन हो सकता है। अनावश्यक सेवन से मतली, दस्त, पेट दर्द और एलर्जी जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।


