36 सरहदी गांवों में मिशन मोड में विकास की तैयारी
मधुबनी जिले के सीमावर्ती गांवों में अब विकास कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा। वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II के तहत 36 चयनित गांवों की प्राथमिकता आधारित योजनाएं तैयार की जाएंगी। डीडीसी तुषार कुमार ने सभी विभागों के योजनाओं की गुणवत्ता और समय पर पूर्णता के निर्देश दिए।

मधुबनी,प्रधान संवाददाता। जिले के सीमावर्ती गांवों में अब विकास कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा। वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम-II के तहत जिले के सात प्रखंडों के 36 चयनित गांवों की जरूरतों का प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं तैयार की जाएंगी। डीडीसी तुषार कुमार ने संबंधित विभागों के पदाधिकारियों के साथ कार्यक्रम की विभागवार प्रगति की समीक्षा की और कार्ययोजना के अनुरूप सभी योजनाओं को मानक एवं गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया।
गांवों का हुआ है चयन
डीडीसी ने कहा कि सीमावर्ती गांवों का विकास सिर्फ सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, सड़क, डिजिटल एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी, कौशल विकास, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए समेकित तरीके से काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक गांव की स्थानीय जरूरत, उपलब्ध संसाधन और विकास की संभावनाओं के आधार पर योजनाओं का चयन किया जाए।
आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर
गांवों का हुआ है चयन : कार्यक्रम के तहत बासोपट्टी, हरलाखी, जयनगर, मधवापुर, लदनियां, खुटौना और लौकही प्रखंडों के 36 गांव चयनित हैं। बासोपट्टी के खौना, जोंकी, लौठवा व मझौरा; हरलाखी के गंगौर, गोपालपुर, हरलाखी, कमतौल, करुणा, मनोहरपुर, नहरनियां, फुलहर, पिपरौन व उमगांव; जयनगर के बेलही, शिलानाथ, दुल्लीपट्टी, उसराही व देवधा; मधवापुर के बसबरिया, दुर्गापट्टी, हनुमान नगर, लोमा, महुआ, परसा, रामनगर कजरा व सहार; लदनियां का जोगिया; खुटौना के अनहरबन, बंदरझूली, पिपराही व लछमीपुर तथा लौकही के नारी, थरवाही, हरभंगा, महदेवा, अन्धरामठ व भरफोरी शामिल हैं। बैठक में विभागों के बीच बेहतर कन्वर्जेंस पर विशेष जोर दिया गया। डीडीसी ने कहा कि जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं ली जाएं। स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और सामुदायिक संस्थाओं को जोड़कर रोजगार एवं स्वरोजगार के स्थायी अवसर विकसित करने का निर्देश दिया गया।
नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता
आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर : मिथिला कला, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और प्राकृतिक संसाधनों की संभावनाओं को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों की सुविधाओं का आकलन कर आवश्यक सुधार के प्रस्ताव तैयार करने तथा डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने का निर्देश दिया गया।
डीडीसी ने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, स्थल निरीक्षण और प्रगति की समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा और निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं को पूरा करना होगा।


