विहिप और संत समाज ने संसद परिसर में भगवा वेश में विपक्ष के प्रदर्शन की निंदा की
विहिप और संत समाज ने संसद परिसर में भगवा वेश में विपक्ष के प्रदर्शन की निंदा की-------------------------सांसद पप्पू यादव और अन्य विपक्षी नेताओं पर साधा निशाना -अयोध्या में चढ़ावा चोरी को लेकर विपक्षी...

विहिप और संत समाज ने संसद परिसर में भगवा वेश में विपक्ष के प्रदर्शन की निंदा की------------------------ -सांसद पप्पू यादव और अन्य विपक्षी नेताओं पर साधा निशाना
विरोध का उद्देश्य
-अयोध्या में चढ़ावा चोरी को लेकर विपक्षी सांसद कर रहे थे प्रदर्शन
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नईदिल्ली। विशेष संवाददाता
संसद भवन परिसर में सपा और अन्य विपक्षी दलों के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर भगवा भेष किए गए प्रदर्शन को लेकर संत समाज व विहिप ने सनातन का अपमान करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। देश भर के संतों ने भगवा कपड़े पहनकर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और विपक्ष के अन्य सांसदों द्वारा किए गए एक नाटक की शुक्रवार को निंदा की और कहा कि इस प्रदर्शन से हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान हुआ है। अखिल भारतीय संत समिति इस विरोध-प्रदर्शन की आलोचना की और इसमें शामिल सांसदों के निष्कासन की मांग की।
सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग
संत समिति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से प्रदर्शन में शामिल सांसदों की सदस्यता रद्द करने की अपील की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी भी चढ़ावा चोरी के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल थे। शुक्रवार सुबह संसद के मकर द्वार के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए सांसदों ने चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़ के नारे लगाए। सांसदों ने मकर द्वार की सीढ़ियों के सामने दान-पात्र रखे और निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव उन बक्सों के पास बैठ गए। एक नाटक के तौर पर, राहुल गांधी समेत सांसदों ने बक्सों में पैसे डाले, जबकि गेरुआ कपड़े पहने यादव ने राम मंदिर में कथित चोरी को दिखाने के लिए पैसे अपनी जेब में डाल लिए।
कानूनी कार्रवाई की संभावना
विहिप के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त सचिव सुरेंद्र जैन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित यादव तथा गांधी और कांग्रेस के अन्य सांसदों एवं समाजवादी पार्टी के अन्य सांसदों ने हिंदू संतों के कपड़े पहनकर अश्लील विरोध प्रदर्शन किया। विहिप उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि वह उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें ताकि कोई भी इस तरह हिंदू आस्था का अपमान करने की हिम्मत न करे। उन्होंने विपक्षी नेताओं को मौलवी या पादरी का भेष धारण कर इन धर्मों का मजाक उड़ाने की चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि वे केवल हिंदू मान्यताओं को निशाना बना सकते हैं।
सनातन धर्म का अपमान
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्रानंद सरस्वती ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, अन्य कांग्रेस सांसदों और पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनकर सनातन धर्म का अपमान करने के लिए संसद परिसर का गलत इस्तेमाल करना अस्वीकार्य है। सनातन धर्म और संतों के त्याग एवं तपस्या को बदनाम करने की कोशिश को अखिल भारतीय संत समिति बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को देश के हिंदुओं से बिना शर्त माफ़ी मांगनी चाहिए। वरना, राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष को उनकी सदस्यता खत्म कर देनी चाहिए। अखिल भारतीय संत समिति की यह मांग है।
सांस्कृतिक अपमान का आरोप
सरस्वती ने कहा कि अगर आप भाजपा से राजनीतिक रूप से लड़ना चाहते हैं, तो लड़ें, लेकिन भेष बदलकर भगवा वस्त्र पहनकर भगवान राम का अपमान करना, सनातन धर्म का अपमान करना और संतों का अनादर करना अस्वीकार्य है। हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।आचार्य विक्रमादित्य ने कहा कि जबकि विपक्ष ने संतों को कथित मंदिर दान चोरी में शामिल दिखाने की कोशिश की, जांच में केवल कुछ कर्मचारी शामिल पाए गए और उन्हें पहले ही जेल भेजा जा चुका है। इन सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
विरोध प्रदर्शन की निंदा
सरयू आरती समिति के अध्यक्ष महामंडलेश्वर शशिकांत दास ने यादव के कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने साधु का वेश धारण किया था और विरोध प्रदर्शन के दौरान दुर्व्यवहार किया। इस तरह सनातन धर्म और हमारी संस्कृति का अपमान हुआ है। यह बेहद निंदनीय काम है। भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने आरोप लगाया कि यह प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और पूरे विपक्ष द्वारा रची गई साजिश थी। उनके कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं। हम लोकसभा अध्यक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आग्रह करते हैं। महामंडलेश्वर नारायण गिरि जी महाराज ने कहा कि देश में ऐसे मुद्दे उठाने वालों का सनातन धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। विरोध प्रदर्शन की आलोचना करने वालों में राम मंदिर के न्यासी महंत दिनेंद्र दास, हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास, रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम, आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर, महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज, संत सत्येंद्र दास वेदांती और चित्रगुप्त पीठाधीश्वर के स्वामी सच्चिदानंद महाराज शामिल थे।
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