दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासित जीवन ही सफलता का आधार: प्रो. सत्यदेव निगमालंकार
दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासित जीवन ही सफलता का आधार: प्रो. सत्यदेव निगमालंकार दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासित जीवन ही सफलता का आधार: प्रो. सत्यदेव निगमालंकार

गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में आयोजित आर्य वीर एवं आर्या वीरांगना दल प्रशिक्षण शिविर में रविवार को वैदिक विद्वान प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता। दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासित जीवन ही श्रेष्ठ मार्ग का एकमात्र माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों के बीच संवाद का सशक्त मंच है, जिससे व्यक्तित्व निर्माण और वैदिक संस्कारों का विकास होता है। गुरुकुल सभागार में आयोजित बौद्धिक सत्र में प्रो. निगमालंकार ने युवाओं से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। दूसरे सत्र में भौतिकीविद् प्रो. एलपी पुरोहित ने भौतिक और आध्यात्मिक जीवन के मूलभूत सिद्धांतों तथा उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
वहीं, आचार्या प्रेरणा ने आधुनिक शिक्षा में वैदिक ज्ञान की प्रासंगिकता बताते हुए प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से शिविरार्थियों का मार्गदर्शन किया। शिविर व्यवस्थापक बृहस्पति आर्य और संदीप वेदालंकार के नेतृत्व में बौद्धिक एवं शारीरिक प्रशिक्षण कराया गया। सायंकालीन सत्र में आर्य वीर और आर्या वीरांगनाओं ने भारतीय पारंपरिक विधाओं के माध्यम से आत्मरक्षा एवं शारीरिक दक्षता का अभ्यास किया। सह संयोजक डॉ. मयंक पोखरियाल ने शिविर की विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया। इस अवसर पर धर्मवीर आर्य, मनप्रीत, बोबी आर्य, दिनेश आर्य, डॉ. बिंदु मलिक, डॉ. कल्पना सागर, डॉ. सुनीता रानी, नितिन कंबोज, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. कपिल मिश्रा सहित अन्य शिक्षक एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?


