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Vande Bharat: राजनीति के चलते लॉन्च हुई इंदौर-भोपाल समेत छह रूट्स की वंदे भारत, बोले सुधांशु मणि

Vande Bharat: उन्होंने कहा कि 20 रूटों पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन इंदौर-भोपाल सहित छह रूट ऑक्यूपेंसी पाने में इसलिए विफल रहे, क्योंकि उन्हें राजनीति की वजह से लॉन्च किया गया था।

Vande Bharat: राजनीति के चलते लॉन्च हुई इंदौर-भोपाल समेत छह रूट्स की वंदे भारत, बोले सुधांशु मणि
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 02 Dec 2023 10:06 PM
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Vande Bharat: कुछ साल पहले लॉन्च हुई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों ने भारतीय रेलवे की दिशा और दशा बदल दी है। अब तक लगभग सभी राज्यों को यह ट्रेन मिल चुकी है, जिसमें यात्रियों की बड़ी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इस बीच, वंदे भारत प्रोजेक्ट के मास्टरमाइंड सुधांशु मणि ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेन को 20 रूटों पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन इंदौर-भोपाल सहित छह रूट ऑक्यूपेंसी पाने में इसलिए विफल रहे, क्योंकि उन्हें राजनीति की वजह से लॉन्च किया गया था। उन्होंने बताया कि अगले पांच से छह सालों में सरकार की योजना 500 वंदे भारत ट्रेनों को शुरू करने की है।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' के अनुसार, मणि ने एक कार्यक्रम में कहा, ''अगले साल तक लॉन्च होने वाली ट्रेनों का स्लीपर संस्करण राजधानी एक्सप्रेस की जगह लेगा। 35 वंदे भारत मार्गों में से, 20 मार्गों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन कम से कम 6 मार्ग खराब हैं क्योंकि यात्री कम हैं और राजनीति के कारण लॉन्च किए गए थे। आदर्श रूप से इन मार्गों पर ट्रेनें शुरू नहीं की जानी चाहिए थीं और जहां यात्री हैं, वहां ट्रेन शुरू करना बहुत महत्वपूर्ण है।'' इंदौर-भोपाल वंदे भारत ट्रेन को लेकर उन्होंने आगे कहा कि जब बसें समान समय लेती हैं और केवल आधा किराया लेती हैं, तो यात्री अधिक किराए वाली ट्रेन लेना पसंद नहीं करेंगे। मणि ने कहा, "वंदे भारत का किराया कम करना कोई समाधान नहीं है क्योंकि यह एक महंगी ट्रेन है और इसे इस तरह से चलाया जाना चाहिए कि इसे पैसा मिले।"

मणि ने अगले साल तक वंदे मेट्रो शुरू करने की सरकार की योजना की आलोचना करते हुए कहा कि ऊंचे किराये से यात्रियों की संख्या में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि आप किराया कम करते हैं, तो पूरा उद्देश्य विफल हो जाता है। मुझे नहीं लगता कि जब तक किराया कम नहीं किया जाता, वंदे मेट्रो को ग्राहक मिलने वाले हैं, लेकिन यह आत्म-पराजय होगा। मणि ने कहा कि सरकार को बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाने की जरूरत है जो सेमी-हाई स्पीड ट्रेन आंदोलन का समर्थन करने के लिए धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ''पटरियों को 160 किमी प्रति घंटे के लायक बनाने का काम जारी है लेकिन गति धीमी है। एक बार जब आप ट्रैक को 160 किमी प्रति घंटे के लायक बना देंगे तो आप इसे वास्तव में रातों-रात बना देंगे, जहां लोग फ्लाइट से नहीं बल्कि ट्रेन से जाना पसंद करेंगे।''

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