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भारत में जल्द दूर होगी वैक्सीन की किल्लत, सरकार इस फॉर्मूले पर कर रही काम

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्ली।Published By: Himanshu Jha
Thu, 03 Jun 2021 02:52 PM
भारत में जल्द दूर होगी वैक्सीन की किल्लत, सरकार इस फॉर्मूले पर कर रही काम

भारत में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार धीमी हुई है। इसके साथ पूरे देश में टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है। हालांकि अभी इसकी रफ्तार कम है। कारण ही टीके की कमी। केंद्र सरकार इसे दूर करने के लिए हर कोशिश कर रही है। देश में बनने वाले टीकों के प्रोडक्शन की रफ्तार बढ़ाई जा रही है। साथ ही वैक्सीन बनाने वाली विदेशी कंपनियों से भी चर्चा जारी है।

हाली ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर पांच दिवसीय दौरे पर अमेरिका गए थे। वहां भी उन्होंने वैक्सीन की कमी को दूर करने के लिए सरकार से लेकर कंपनियों के साथ चर्चा की। इसके अलावा विदेशी टीकों के भारत में निर्माण के रास्ते में आने वाली रुकावटों को भी दूर किया जा रहा। अगर सबकुछ सही रफ्तार से होता है तो जल्द गी वैक्सीन की किल्लत दूर हो सकती है।

आज विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, 'हम भारत में टीकों कr सोर्सिंग और संभावित स्थानीय निर्माण के बारे में फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन और मॉडर्न जैसे प्रमुख वैक्सीन निर्माताओं के संपर्क में हैं। हमने स्पुतनिक-वी टीकों के निर्माण में तेजी लाने में भी मदद की है।'

सीरम ने स्पूतनिक-वी टीका बनाने के लिए DCGI से अनुमति मांगी
वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने देश में कोविड-19 टीके स्पूतनिक वी के उत्पादन की अनुमति मांगने के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को आवेदन दिया है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पुणे स्थित कंपनी ने जांच विश्लेषण और परीक्षण के लिए भी मंजूरी मांगी है। इस समय डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज भारत में रूस के स्पूतनिक वी टीके का उत्पादन कर रही है।

एसआईआई पहले ही सरकार को बता चुका है कि वह जून में 10 करोड़ कोविशील्ड खुराकों का उत्पादन और आपूर्ति करेगा । वह नोवावैक्स टीका भी बना रहा है। नोवावैक्स के लिए अमेरिका से नियामक संबंधी मंजूरी अभी नहीं मिली है।  स्पूतनिक वी की 30 लाख खुराक की खेप मंगलवार को हैदराबाद पहुंची थी।

DCGI ने विदेश में निर्मित टीकों के इस्तेमाल के लिए नियमों में दी है छूट
डीसीजीआई द्वारा कल ही विदेश में निर्मित कोविड-19 रोधी टीकों की जांच करने और ऐसी कंपनियों के लिए टीकों का इस्तेमाल शुरू करने के बाद ब्रिजिंग ट्रायल करने की अनिवार्यता में छूट दी गई है, जिससे टीकों की उपलब्धता बढ़ेगी। भारत के औषधि महानियंत्रक का यह फैसला फाइजर तथा सिप्ला जैसी कंपनियों की मांग की पृष्ठभूमि में आया है। उन्होंने भारत को आयातित टीकों की आपूर्ति के लिए की गई बातचीत के दौरान यह मांग की थी। अभी तक किसी भी विदेशी कंपनी को भारत में कोरोना वायरस रोधी टीका शुरू करने से पहले ब्रिजिंग ट्रायल करना होता था। इसमें सीमित संख्या में स्थानीय स्वयंसेवकों पर टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा को परखा जाता है।

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