पशुओं का समय पर टीका लगवाएं, दवाओं की जरूरत होगी कम
पशुओं को बीमारियों से बचाने और इलाज में होनेवाले खर्च को कम करने के लिए समय पर टीकाकरण कराने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग ने पशपाकों को जागरूक किया है कि टीकाकरण से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उसका आर्थिक लाभ भी होता है।

पशुओं को बीमारियों से बचाने और इलाज में होनेवाले खर्च को कम करने के लिए पशुपालकों को समय पर टीकाकरण कराने पर जोर दिया जा रहा है। पशुपालन विभाग लगातार किसानों और पशुपालकों को जागरूक कर रहा है कि बीमार पड़ने के बाद पशुओं को बार-बार एंटीबायोटिक दवाएं खिलाने की स्थिति से बचने के लिए पहले से ही टीकाकरण कराना जरूरी है। समय पर टीकाकरण से पशुओं में कई बीमारियों और महामारियों के संक्रमण का खतरा कम हो सकता है। पशुपालन विभाग के अनुसार टीकाकरण से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है। इसका फायदा पशुपालकों को आर्थिक रूप से भी मिलता है। पशु बीमार कम पड़ेंगे तो दवाओं और इलाज पर खर्च कम होगा, वहीं पशुपालन में होने वाली लागत घटने से मुनाफा बढ़ सकता है。
टीकाकरण के सावधानियाँ
विभाग ने टीकाकरण के दौरान कई सावधानियां बरतने की अपील की है। पहला टीकाकरण केवल स्वस्थ पशुओं में ही कराया जाना चाहिए। इससे कम से कम दो सप्ताह पहले पशुओं को कृमिनाशक दवा देने की सलाह दी गई है। बीमार और कमजोर पशुओं का टीकाकरण नहीं करना चाहिए। संभावित बीमारी फैलने के समय से करीब 20-30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना बेहतर माना जाता है।
टीकाकरण की प्रक्रिया
टीकाकरण के लिए मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में सुरक्षित रखे गए टीकों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। जहां पशुओं की संख्या अधिक हो, वहां झुंड के रूप में टीकाकरण कराना जरूरी होता है। पशुपालकों से पशु स्वास्थ्य कार्ड बनाकर टीकाकरण का पूरा रिकॉर्ड रखने की अपील की गई है ताकि समय आने पर अगली खुराक और टीकाकरण की जानकारी आसानी से मिल सके।


