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उत्तराखंड में फिर संकटमोचक बना चिनूक, मजदूरों को बचाने के लिए भारतीय वायुसेना ने इसे ही क्यों चुना

Uttarkashi Tunnel: चिन्यालीसौड़ में पहले ही ट्विन रोटर हैवी लिफ्ट चिनूक हेलीकॉप्टर तैनात कर दिया था। दरअसल, यह हेलीकॉफ्टर बचाव अभियानों के दौरान एयरलिफ्ट की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाता है।

उत्तराखंड में फिर संकटमोचक बना चिनूक, मजदूरों को बचाने के लिए भारतीय वायुसेना ने इसे ही क्यों चुना
Nisarg Dixitलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 29 Nov 2023 07:03 AM
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Indian Air Force News: उत्तरकाशी से खुशखबरी आ गई है। यहां सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। लंबी मशक्कत और बड़ी टीम ने इस मुश्किल काम को मंगलवार रात को अंजाम दे दिया। खास बात है कि इस टीम का हिस्सा भारतीय वायु सेना का चिनूक हेलीकॉप्टर भी रहा, जिसने बाहर निकलने के बाद मजदूरों को एयरलिफ्ट किया। अब इसकी वजह भी खास है कि एयरलिफ्ट के लिए चिनूक का ही चुनाव क्यों किया गया।

भारतीय वायुसेना ने चिन्यालीसौड़ में पहले ही ट्विन रोटर हैवी लिफ्ट चिनूक हेलीकॉप्टर तैनात कर दिया था। दरअसल, यह हेलीकॉफ्टर बचाव अभियानों के दौरान एयरलिफ्ट की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाता है। खबरें हैं कि इससे पहले भी कई मानवीय मिशनों में खासा मददगार रहा है। अब सवाल पर आते हैं कि चिनूक ही क्यों?

चिनूक के निर्माता बोइंग का कहना है कि ऊंचाई वाले स्थानों पर ज्यादा पेलोड ले जाने की क्षमता के चलते यह हेलीकॉप्टर हिमालयी क्षेत्रों में काम करने के लिए ज्यादा उपयुक्त है। फिलहाल, भारतीय वायुसेना इस तरह के ऑपरेशन के लिए रूसी Mi-17 हेलीकॉप्टर्स और CH47 चिनूक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करता है। इसके अलावा चिनूक एक बार में 44 जवानों या 24 स्ट्रेचर एक बार में लेकर उड़ान भर सकता है।

अब अगर मजदूरों को स्ट्रेचर्स के साथ एयरलिफ्ट किया गया है, तो हेलीकॉप्टर को कम से कम दो बार उड़ान भरनी होगी। इसके टेंडम रोटर्स हेलीकॉप्टर को स्थिरता, नियंत्रण देते हैं। साथ ही इसकी वजह से लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है। यह 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।

कोई और क्यों नही?
माना जा रहा है कि हवाई पट्टी की सीमित लंबाई होने के चलते C-17, An-32 या C-130J को ऐसे अभियान के लिए तैनात नहीं किया गया था। इसके अलावा Mi-17 हेलीकॉप्टर में एक उड़ान में सिर्फ 25 लोगों को लेकर जाने की क्षमता है। अगर इस मिशन में Mi-17 को अगर तैनात किया जाता, तो ज्यादा उड़ानें भरनी पड़ती। ऐसे में उन्हें AIIMS में इलाज मिलने में कुछ समय लग जाता।

2021 में भी हुआ इस्तेमाल
साल 2021 में उत्तराखंड के ही चामोली इलाके में ग्लेशियर के फटने से सुरंग ब्लॉक हो गई थी। उस दौरान करकीब 130 मजदूर फंस गए थे। तब भी यहां चिनूक हेलीकॉप्टर को तैनात किया गया था। कोरोनावायरस महामारी के बीच अरुणाचल प्रदेश में भी ऊंचाई वाले स्थानों पर मेडिकल सप्लाई पहुंचाने के लिए चिनूक हैलीकॉप्टर्स की मदद ली गई थी।

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