आधी-अधूरी तैयारियों के बीच आज से शुरू होगा राज्य खेल विवि का पहला सत्र
हल्द्वानी में गौलापार स्थित उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय का पहला सत्र आज शुरु हो रहा है। सत्र की शुरुआत आधी-अधूरी तैयारियों और सीमित स्टाफ के बीच हो रही है। विश्वविद्यालय में दो डिग्री और आठ डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू होंगे, लेकिन संसाधनों की कमी शिक्षा में बाधा डाल रही है।

हल्द्वानी, वरिष्ठ संवाददाता। गौलापार स्थित उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय का पहला सत्र आज सोमवार से शुरू होने जा रहा है। हालांकि सत्र की शुरुआत किसी भव्य जश्न के बजाए आधी-अधूरी तैयारियों, सीमित स्टाफ और अस्थायी व्यवस्थाओं के बीच हो रही है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण सत्र को पहले ही एक हफ्ते के लिए टाला जा चुका था। विश्वविद्यालय में इस सत्र से दो डिग्री और आठ डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। 240 सीटों में से अब तक 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रवेश ले लिया है। पढ़ाई और ट्रेनिंग का खाका तो खिंच गया है लेकिन संसाधनों की कमी अब भी बड़ा रोड़ा बनी हुई है। वहीं विवि में आठ खेलों के डिप्लोमा कोर्स शुरू हो रहे हैं, जिनमें फुटबॉल भी शामिल है। विडंबना यह है कि फुटबॉल का मैदान अभी तक बनकर तैयार ही नहीं हो सका है। ऐसे में मजबूरीवश फुटबॉल खिलाड़ियों को फिलहाल क्रिकेट मैदान पर ही अभ्यास करना पड़ेगा। वहीं बहुउद्देश्यीय हॉल में बैडमिंटन, बास्केटबॉल और बॉक्सिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। जबकि कराटे पाठ्यक्रम के लिए वर्तमान में एक भी ट्रेनर उपलब्ध नहीं है। सोमवार को कराटे के 2 पदों पर अनुबंध के आधार पर भर्ती की जाएगी। इसके अलावा बॉक्सिंग, ताइक्वांडो, तैराकी और बास्केटबॉल में भी 1-1 प्रशिक्षक के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी。
नियमित भर्तियां अटक गईं
विश्वविद्यालय के लिए हाल ही में 94 पदों के सृजन को प्रशासनिक मंजूरी मिली है, लेकिन सेवा नियमावली न बनने के कारण नियमित भर्तियां अटकी हुई हैं। फिलहाल खेल विभाग से संबद्ध उप क्रीड़ा अधिकारी और सहायक अध्यापक ही दफ्तरी कामकाज के साथ-साथ कक्षाओं में पढ़ाने और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इनका कहना
प्रदेश के पहले खेल विश्वविद्यालय का प्रारंभिक सत्र सोमवार से शुरू होगा। यहां प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-रसिका सिद्वकी, उप कुलसचिव, उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय


