यूपी में 44 चीनी मिलें खुद बना रहीं बिजली
- मुरादाबाद पहले व लखनऊ मंडल दूसरे स्थान पर लखनऊ, विशेष संवाददाता यूपी

यूपी की 122 में 44 निजी चीनी मिलें अब खुद अपनी बिजली तैयार कर रही हैं। खोई से बिजली पैदा करने के मामले में मुरादाबाद मंडल शीर्ष स्थान पर है। यहां 326 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। लखनऊ मंडल 274 मेगावाट के साथ दूसरे और 197.67 मेगावाट से सहारनपुर मंडल तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा 185.50 मेगावाट के साथ बरेली चौथे और 143.50 मेगावाट पर मेरठ मंडल पांचवें स्थान पर है।
मुख्यमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से प्रभावित होकर किए जा रहे इस उपक्रम से पेराई सत्र के दौरान निकलने वाली खोई से स्थानीय स्तर पर बिजली पैदा होने के चलते ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर खुले हैं। करीब 75 फीसदी चीनी मिलें अपने बॉयलर में गन्ने की खोई जलाकर टरबाइन चलाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया मिलों के अपने सह-उत्पाद संयंत्रों के जरिए पूरी की जा रही है। इससे न केवल मिलों की मुख्य पावर ग्रिड पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो गई है, बल्कि अपनी खपत के बाद बचने वाली अतिरिक्त बिजली को बेचकर मिलें दोहरा मुनाफा भी बटोर रही हैं।
ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती
चार हजार इकाइयों ने ग्रिड से नाता तोड़ा
यूपी में पंजीकृत कारखानों की संख्या 32 हजार के पार है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसका हल कचरा और बायोमास प्रबंधन में तलाशा गया। योगी सरकार के प्रोत्साहन से वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य की 4,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों ने इस तकनीक के दम पर मुख्य ग्रिड पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म कर ली है। जो कचरा निकायों के लिए सिरदर्द था, वह अब उद्योगों की तकदीर संवार रहा है।
पेपर मिलों का कचरा प्रबंधन
दिल्ली-हरियाणा से सूखा कचरा खरीद रहीं 35 पेपर मिलें
मुजफ्फरनगर और शामली क्षेत्र की 90% निजी पेपर मिलों ने अपने परिसरों में 5 से 10 मेगावाट तक के कैप्टिव पावर प्लांट लगाए हैं। पूरे क्षेत्र की 35 मिलें पूरी तरह इसी व्यवस्था पर चल रही हैं, जिनमें अकेले मुजफ्फरनगर की 15 मिलें हैं। यहां मांग इतनी बढ़ चुकी है कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से सूखा कचरा मंगाया जा रहा है।
हरित ऊर्जा का मॉडल
शिवरी में आकार ले रहा 15 मेगावाट का प्लांट
कचरा प्रबंधन और हरित ऊर्जा का यह मॉडल अब पूरे प्रदेश में फैल रहा है। नोएडा, कानपुर और सोनभद्र में तेजी से ऐसे संयंत्र लगे हैं। लखनऊ के शिवरी में 15 मेगावाट का वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट निर्माणाधीन है। इससे शहरों से प्लास्टिक कचरा साफ हो रहा है और कोयले व प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों की खपत में भारी कमी आई है।
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कोट
मिल की पेराई क्षमता के अनुपात में खोई निकलती है और उसी के आधार पर बिजली उत्पादन का पैमाना तय होता है। इस काम से ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के लोगों को स्थानीय स्तर पर काम मिल रहा है। इससे युवाओं को रोजगार के लिए महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ रहा है। अभिषेक आनंद, गन्ना उपायुक्त।
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