आयोगों की गलती, वर्षों से इंसाफ को भटक रहे बेरोजगार
प्रयागराज में चयन आयोगों की गलतियों के कारण कई बेरोजगार वर्षों से परेशान हैं। महिला अभ्यर्थी आरती ने चयन के बावजूद नाम हटाए जाने पर शिकायत की है। इसी तरह मणीन्द्र कुमार पांडेय का भी चयन नियमों के खिलाफ किया गया है। दोनों ने आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रयागराज संजोग मिश्र चयन आयोगों की गलती का खामियाजा बेरोजगार वर्षों से भुगत रहे हैं। कहीं चयन के बाद नाम हटा दिया गया तो किसी का वर्ग बदलकर दूसरे को नौकरी दे दी। जालौन (उरई) की रहने वाली महिला अभ्यर्थी आरती (पत्नी रणदीप अवस्थी) को तो उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने दो बार चयन के बावजूद बाहर कर दिया। छह साल से इंसाफ के लिए भटक रहीं आरती ने अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को प्रत्यावेदन देकर इंसाफ की गुहार लगाई है।
चयन आयोग की गलती
2019 में जारी विज्ञापन संख्या 47 में शारीरिक शिक्षा विषय के लिए जारी मूल चयन सूची में 60 पदों के सापेक्ष आरती का नाम सामान्य सूची में क्रमांक 39 पर अंकित था। इसके बाद जारी दो संशोधित सूचियों से बिना कोई कारण बताए उनका नाम पूरी तरह हटा दिया गया। इसी प्रकार 2021-22 में जारी विज्ञापन संख्या 50 में भी यही कहानी दोहराई गई। मुख्य योग्यता सूची (रोल नंबर 5005080231) में क्रमांक आठ पर चयन होने के बावजूद, बाद में जारी संशोधित सूचियों से उनका नाम फिर गायब कर दिया गया।
अधिकारिक पत्राचार की कमी
आयोग में पूछताछ पर उन्हें पता चला कि 'टंकण या विभागीय त्रुटि' के कारण उनका नाम हटाया गया। हालांकि आयोग की ओर से इस संबंध में आज तक अभ्यर्थी से कोई आधिकारिक पत्राचार नहीं किया गया और न ही नाम हटाए जाने का कोई ठोस कारण बताया गया। आरती ने चयन आयोग से गुहार लगाई है कि दोनों विज्ञापनों (47 और 50) के परिणामों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अन्य अभ्यर्थियों का हाल
महिला को पुरुष वर्ग में चुना, वास्तविक छात्र बेरोजगार
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की गलती के कारण एक अभ्यर्थी वर्षों से भटक रहा है। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती के लिए 2013 में जारी विज्ञापन में कुशीनगर के मणीन्द्र कुमार पांडेय ने संस्कृत विषय में सामान्य श्रेणी व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित उप श्रेणी के तहत आवेदन किया था। इस भर्ती के बालक वर्ग में कुल 94 पद व बालिका वर्ग में कुल नौ पदों का पैनल 25 जनवरी 2017 को जारी किया गया था। इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी के तहत प्रथम स्थान पर अखिलेश कुमार एवं द्वितीय स्थान पर महिला वर्ग की एक अभ्यर्थी का चयन किया गया। मणीन्द्र का दावा है कि बालक और बालिका वर्ग के अलग-अलग आवेदन लिए गए थे। बालक वर्ग में कुल 94 पदों के प्रति स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित के लिए दो सीटें आरक्षित थी जबकि बालिका वर्ग में कोई भी पद नहीं था। इसके बावजूद बालिका वर्ग की अभ्यर्थी का इस कोटे में मनमाने तरीके से चयन कर दिया गया जबकि नियमानुसार मणीन्द्र कुमार पांडेय का चयन होना चाहिए था। जीव विज्ञान विषय में ऐसा ही किया भी गया था। मणीन्द्र दर्जनों प्रत्यावेदन और आईजीआरएस पर शिकायत कर चुके हैं लेकिन अब तक न्याय नहीं मिल सका है।


