सहारनपुर : यूपी में बैंकों की सुस्ती से अटके युवाओं के सपने, 1.5 लाख लक्ष्य, महज 23 हजार को ऋण
प्रदेश सरकार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना चला रही है, लेकिन बैंकिंग व्यवस्था में सुस्ती इस योजना के लिए सबसे बड़ी बाधा बन रही है। 15.39 प्रतिशत ऋण वितरण हुआ है, जिससे हजारों युवाओं का स्वरोजगार का सपना प्रभावित हो रहा है।

प्रणव अग्रवाल। प्रदेश सरकार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना को मिशन मोड में चला रही है, लेकिन बैंकिंग व्यवस्था की सुस्ती इस महत्वाकांक्षी योजना की सबसे बड़ी बाधा बनती दिख रही है। 15 जुलाई 2026 तक प्रदेश में डेढ लाख लक्ष्य के सापेक्ष 1.13 लाख से अधिक आवेदन मिलने और 1.03 लाख आवेदन बैंकों को भेजे जाने के बावजूद केवल 24,128 मामलों में ऋण स्वीकृत हो सका, जबकि वास्तविक ऋण सिर्फ 23,082 युवाओं तक ही पहुंच पाया। यानी 1.50 लाख के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 15.39 प्रतिशत ऋण वितरण हुआ। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि हजारों युवाओं के स्वरोजगार का सपना बैंकिंग प्रक्रिया में अटका हुआ है। मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना के तहत प्रदेश में 1.50 लाख युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक 1,13,069 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,03,250 आवेदन जांच के बाद बैंकों को भेजे गए। इसके बावजूद केवल 24,128 मामलों में बैंक ऋण स्वीकृत कर सके और 23,082 युवाओं को ही ऋण वितरित हुआ। इस प्रकार लक्ष्य के मुकाबले कुल ऋण वितरण 15.39 प्रतिशत पर सिमट गया। योजना के आंकड़े बताते हैं कि एक लाख से अधिक आवेदन बैंकिंग प्रणाली तक पहुंचने के बावजूद करीब 80 हजार आवेदन अब भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। बैंकों की धीमी स्वीकृति प्रक्रिया के कारण हजारों युवा अपना उद्योग शुरू नहीं कर पा रहे हैं। इससे सरकार के रोजगार सृजन अभियान की गति भी प्रभावित हो रही है।
आजमगढ़ बना प्रदेश का नंबर-1 जिला
-मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना में आजमगढ़ ने सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। जिले में लक्ष्य के मुकाबले 26.76 प्रतिशत ऋण वितरण हुआ, जबकि स्वीकृति प्रतिशत 29 फीसदी रहा। इसके साथ ही आजमगढ़ प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया।
गौतमबुद्ध नगर सबसे पीछे, कई बड़े जिले भी फिसड्डी
-योजना में सबसे कमजोर प्रदर्शन गौतमबुद्ध नगर का रहा, जहां लक्ष्य के मुकाबले केवल 8.12 प्रतिशत ऋण वितरण हुआ। इसके बाद एटा (9.00%), रायबरेली (10.72%), मुजफ्फरनगर (10.84%) और श्रावस्ती (11.29%) सबसे पीछे रहे। अधिकांश जिलों में बैंक लक्ष्य के अनुरूप ऋण वितरण नहीं कर पाए।
सहारनपुर मंडल के तीनों जिले पिछडे
-सहारनपुर जिले में 2,900 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष 2,444 आवेदन प्राप्त हुए और 412 मामलों में ऋण स्वीकृत हुआ। अब तक 408 युवाओं को ऋण वितरित किया जा चुका है। जिले का ऋण वितरण प्रतिशत 14.07 रहा, जो प्रदेश के औसत प्रदर्शन से भी कम है। मंडल के मुजफ्फरनगर और शामली भी फिसड्डी रहे है। शामली में 13.8 प्रतिशत और मुफ्फरनगर में 10.84 प्रतिशत ऋण ही वितरित किया जा चुका है।
प्रदेश में सबसे आगे और सबसे पीछे
टॉप-5 जिले (ऋण वितरण प्रतिशत)
आजमगढ़ — 26.76%
रामपुर — 23.75%
बलिया — 21.95%
झांसी — 21.60%
फतेहपुर — 19.79%
सबसे कमजोर 5 जिले
गौतमबुद्ध नगर — 8.12%
एटा — 9.00%
रायबरेली — 10.72%
मुजफ्फरनगर — 10.84%
श्रावस्ती — 11.29%
एक नजर में प्रदेश का प्रदर्शन
लक्ष्य : 1,50,000
प्राप्त आवेदन : 1,13,069
बैंकों को भेजे गए आवेदन : 1,03,250
बैंक द्वारा स्वीकृत : 24,128
ऋण वितरित : 23,082
स्वीकृति प्रतिशत : 16.09%
ऋण वितरण प्रतिशत : 15.39%
वर्जन--
-मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना में अधिक से अधिक पात्र युवाओं को लाभ दिलाने के लिए विभाग लगातार बैंकों के साथ समन्वय कर रहा है। लंबित आवेदनों की नियमित समीक्षा की जा रही है और जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (डीएलसीसी) की बैठकों में भी मामलों को प्राथमिकता से उठाया जाता है। हमारा प्रयास है कि पात्र आवेदनों का शीघ्र निस्तारण कर अधिक से अधिक युवाओं को समय पर ऋण उपलब्ध कराया जाए।
बिरेंद्र कुमार, संयुक्त निदेशक, उद्योग
वर्जन-
-मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है। जिन आवेदनों का निस्तारण लंबित है, उनकी बैंकवार समीक्षा कराई जा रही है। सभी बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र आवेदनों का समयबद्ध स्वीकृति एवं ऋण वितरण सुनिश्चित करें, ताकि युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। जिला प्रशासन इसकी регуляр मॉनिटरिंग कर रहा है।
रूपेश कुमार, कमिश्नर, सहारनपुर मंडल
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लेखक के बारे में
Parnav Aggarwalप्रणव अग्रवाल पिछले करीब 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) सहारनपुर में जिला प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन में अपराध, उच्च शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरें लिखी हैं।
परिचय एवं अनुभव
प्रणव अग्रवाल हिंदी पत्रकारिता के उन सक्रिय पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने अपने काम के जरिए पाठकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है। करीब डेढ़ दशक के अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण एवं एक्सक्लूसिव खबरों पर काम किया। हिन्दुस्तान में कार्य करते हुए उन्होंने अपराध, मेडिकल, उच्च शिक्षा और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी अनेक खोजी और विश्लेषणात्मक खबरें प्रकाशित की हैं। समय के साथ बदलते मीडिया परिवेश और पाठकों की रुचि को समझते हुए उन्होंने खबरों की प्रस्तुति में भी नई दृष्टि विकसित की है।
कॅरियर का सफर
प्रणव अग्रवाल ने अपने पत्रकारिता कॅरियर की शुरुआत वर्ष 2011 में अमर उजाला से की जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। इसके बाद वर्ष 2017 में हिन्दुस्तान समाचार पत्र से जुड़े और यहां उन्हें अपराध, उच्च शिक्षा तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) बीट पर काम करने का अवसर मिला। एएमयू बीट की गहन और प्रभावी कवरेज के लिए उन्हें एएमयू द्वारा मीडिया एक्सीलेंस अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। एचटी ग्रुप की ओर से भी कई बार प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्रणव अग्रवाल ने बीकॉम और एमकॉम की पढ़ाई के साथ-साथ पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। मजबूत शैक्षणिक आधार के कारण उन्हें हिंदी पत्रकारिता में विषयों की गहराई से समझ विकसित करने में मदद मिली। इसी वजह से उन्होंने अपराध, चिकित्सा और उच्च शिक्षा जैसे जटिल विषयों पर भी रिसर्च आधारित और विश्लेषणात्मक खबरें लिखी हैं। उनकी कई एक्सक्लूसिव स्टोरी हिन्दुस्तान के राष्ट्र एवं राज्य स्तर पर विभिन्न संस्करणों में प्रकाशित हुई हैं।
कार्य क्षेत्र एवं दृष्टि
प्रणव अग्रवाल को अपराध, केंद्रीय विश्वविद्यालय, चिकित्सा और उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष पकड़ हासिल है। उन्होंने इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण एक्सक्लूसिव खबरें प्रकाशित की हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और प्रभावी जानकारी पहुंचाना है ताकि पत्रकारिता के प्रति विश्वास और विश्वसनीयता बनी रहे।


