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उत्तर प्रदेश सियासतः गठबंधन पर फिलहाल ‘सम्मानजनक’ का पेच

अखिलेश यादव मायावती

बिहार में भले ही महागठबंधन को लेकर तस्वीर साफ हो रही है लेकिन यूपी में विपक्षी दलों का गठबंधन होगा या नहीं यह अभी यक्ष प्रश्न बना हुआ है? और अगर होगा भी तो उसमें सपा-बसपा के साथ कांग्रेस साथ होगी या नहीं यह अभी पर्दे में ही है। वैसे सपा-बसपा का गठबंधन तो सियासी हलके में तय माना जा रहा है लेकिन उसमें भी अभी पेच हैं कि सपा कितनी सीटों पर लड़ेगी और बसपा की झोली में कौन सी और कितनी सीटें जाएंगी।

सपा-बसपा गठबंधन में पेच

सपा-बसपा दोनों वैसे तो गठबंधन के लिए राजी हैं लेकिन अंदरखाने यह समीकरण क्या होगा यह अभी तक तय नहीं हो पा रहा है। इसमें सबसे ज्यादा रहस्य बसपा की मुखिया मायावती की चुप्पी पैदा कर रही है। मायावती लगातार यह कहती रही हैं कि गठबंधन तभी होगा जब उन्हें ‘सम्मानजनक’ सीटें मिलेंगी। अब सियासी जानकार इस ‘सम्मानजनक’ की गुत्थी को अपने-अपने तरीके से सुलझाने में जुटे हैं। आखिर बसपा के लिए ‘सम्मानजनक’ सीटें कितनी होंगी? यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

माना जा रहा है कि शुरुआती दौर में यह समीकरण बना कि लोकसभा चुनाव 2014 में सपा जिन सीटों पर दूसरे स्थान पर रही वहां वह लड़े और जहां बसपा दूसरे स्थान पर रही वहां बसपा मैदान में उतरे। बसपा 2014 में 34 सीटों पर दूसरे नंबर पर थी और सपा 31 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी लेकिन इस समीकरण पर दोनों में सहमति नहीं बनी। सूत्रों का दावा है कि बसपा इसे ‘सम्मानजनक’ नहीं मानती। ऐसे में नए सिरे से बातचीत जारी है।

कांग्रेस-सपा-बसपा में गठबंधन के पेच

एक ओर तो ‘सम्मानजनक’ सीटों का पेच है तो दूसरी ओर कांग्रेस को साथ लेने पर सपा और बसपा में अतीत के अपने-अपने संशय हैं। बसपा को यह संशय रहता है कि वर्ष 1996 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से गठबंधन का उसे लाभ नहीं हुआ। वहीं दलित कांग्रेस के पराभव से पहले उसका वोट बैंक रहे हैं। बसपा को दलितों के कांग्रेस की झोली में जाने का संशय भी सताता है। दूसरे सपा भी वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से गठबंधन कर कटु अनुभव कर चुकी है। वहीं बसपा को संशय है कि क्या यादव वोट उसकी झोली में जाएंगे? 

तीनों राज्यों के नतीजे ने चर्चा तेज की 

तीन राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद बसपा एक बार फिर पूरी तरह विश्वास से परिपूर्ण दिख रही है। वहीं कांग्रेस भी पूरे जोश में है। ऐसे में वह यूपी में अकेले चुनाव लड़ने को संभावनाओं पर कदम बढ़ाती दिख रही है। कांग्रेस ने अंदरखाने अपने वर्ष 2009 में जीती सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

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