स्वच्छ भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलों में बनेगा ‘स्पेशल सेल’
स्वच्छ भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलों में ‘स्पेशल सेल’ बनाया जाएगा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन सेल के माध्यम से स्वच्छता अभियान की निगरानी करें और आवश्यक कार्रवाई करें। 100 प्रतिशत डूर-टू-डूर कचरा संग्रहण का कार्य पूरा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। स्वच्छ भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलों में अब ‘स्पेशल सेल’ बनाया जाएगा। मुख्य सचिव ने इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन सेल के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी कराएं।
स्वच्छता के प्रति जागरूकता
साथ ही आवश्यकता पड़ने पर यह सेल नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े ठोस अपशिष्ट उत्पादकों के विरुद्ध जल एवं विद्युत आपूर्ति बंद करने जैसी कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को निर्देश भी जारी करेगा। मुख्य सचिव ने ये बात सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की समीक्षा बैठक में सभी जिलाधिकारियों एवं नगर आयुक्तों से कही।
जनभागीदारी का अभियान
इस दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान है। सभी विभाग उत्तर प्रदेश को स्वच्छ, स्वस्थ एवं सतत विकास की दिशा में अग्रणी राज्य बनाने के लिए आपसी समन्वय एवं प्रतिबद्धता से कार्य करें। बैठक में मिशन के विभिन्न घटकों की प्रगति, नगर निकायों में लंबित परियोजनाओं, भूमि संबंधी समस्याओं, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों तथा जिला स्तर पर आवश्यक सहयोग की विस्तृत समीक्षा की गई।
कार्यान्वयन के लिए निर्देश
इस दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी 13,924 वार्डों में 100 प्रतिशत घर-घर कचरा संग्रहण (डूर-टू-डूर कलेक्शन) के कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए और कहा कि धार्मिक, पर्यटन एवं विरासत स्थलों पर पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराते हुए प्रतिदिन दो बार सफाई व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1533 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। बैठक में जिलाधिकारियों की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल देते हुए कहा गया कि प्रत्येक नगर निकाय का नियमित निरीक्षण, समस्याओं का समयबद्ध समाधान, वित्तीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग, जीपीएस एवं सीसीटीवी आधारित निगरानी, अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों को समय पर विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराना, आरडीएफ एवं लीगेसी वेस्ट के निस्तारण में सहयोग, अधिकृत रीसाइक्लर्स के साथ समन्वय, नगर निकायों को निविदा एवं खरीद प्रक्रिया में मार्गदर्शन तथा अपशिष्ट प्रबंधन के लिए भूमि उपलब्ध कराने जैसे कार्य प्राथमिकता पर कराए जाएं।


