5 हजार किसानों को आलू भंडारण पर मिलेगी छूट
प्रदेश सरकार ने आलू उत्पादक किसानों के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुँचाना है। इनमें भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना, आलू भंडारण शुल्क अनुदान योजना और आलू बीज मूल्य छूट योजना शामिल हैं। किसानों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

प्रदेश सरकार ने आलू उत्पादक किसानों के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को बाजार भाव में गिरावट से होने वाले नुकसान से बचाना, आलू के सुरक्षित भंडारण को बढ़ावा देना और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना है। जिले के लगभग 5 हजार आलू किसानों को इन योजनाओं से लाभ मिलने की उम्मीद है। परंतु उसके लिए पोर्टल पर अपना डाटा अपलोड करना पड़ेगा।
योजनाएं
जिला उद्यान अधिकारी हरित कुमार के अनुसार सबसे पहली योजना भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना है। इसके तहत, यदि आलू का बाजार भाव गिरता है, तो पात्र किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार ने इसके लिए एक विशेष भाव स्थिरता कोष बनाया है। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्रफल और प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 कुंतल आलू तक इस योजना का लाभ मिलेगा।
भंडारण शुल्क अनुदान योजना
दूसरी योजना आलू भंडारण शुल्क अनुदान योजना है। इसके अंतर्गत, निजी शीतगृहों में आलू रखने वाले किसानों को भंडारण शुल्क में सहायता दी जाएगी। किसानों को अधिकतम 100 रुपये प्रति कुंतल की दर से अनुदान मिलेगा। इस योजना में एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।
बीज मूल्य छूट योजना
तीसरी योजना आलू बीज मूल्य छूट योजना है। इसके माध्यम से किसानों को नवीन और उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज की खरीद पर अधिकतम 1,000 रुपये प्रति कुंतल तक की छूट मिलेगी। यह योजना किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने और आलू के उत्पादन व उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक होगी।
इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को पोटाटो.यूपीहॉर्टिकल्चर.इन पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। स्वीकृत अनुदान की राशि सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के माध्यम से भेजी जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी हरित कुमार ने किसानों से समय पर आवेदन कर इन योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है。


