किसान सभा ने महंगाई, खाद-बिजली और तेंदुए के हमलों का मुद्दा उठाया
उत्तर प्रदेश किसान सभा ने तहसील परिसर में शांतिपूर्ण धरना दिया। किसानों ने महंगाई, खाद, जलभराव, बिजली कटौती और स्वास्थ्य सेवाओं की समस्याओं का समाधान करने की मांग की। ज्ञापन में खाद, मुआवजा, डॉक्टरों की कमी और विभिन्न समस्याओं का समाधान करने की अपील की गई।

ठाकुरद्वारा। उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेशव्यापी आह्वान पर सोमवार को तहसील परिसर में कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर धरना दिया। इसके बाद उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल को अलग-अलग ज्ञापन भेजे गए। किसान सभा ने महंगाई, खाद की किल्लत, जलभराव, बिजली कटौती, स्वास्थ्य सेवाओं और किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में खाने-पकाने की वस्तुओं, रसोई गैस, चीनी, प्याज और तेल आदि की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने और दाम घटाने की मांग की गई। किसान सभा ने खाद की किल्लत तत्काल दूर कर बिना शर्त सभी किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की। खाद के साथ किसी अन्य वस्तु की जबरन बिक्री बंद करने तथा अंगूठे और आंख की पुतली के मिलान में आ रही दिक्कतों को दूर करने की भी मांग की गई。
जलभराव की समस्या
जलभराव की समस्या से निजात के लिए नालों और नालियों की सफाई तथा जल निकासी की उचित व्यवस्था कराने की मांग की गई। जलभराव से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने को कहा गया। इसके अलावा अघोषित बिजली कटौती जैसी समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की गई।
स्वास्थ्य सेवाओं की मांग
ज्ञापन में जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर संचारी बीमारियों, डेंगू और अन्य बुखार के इलाज, जांच और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था कराने की मांग की गई। अस्पतालों में डॉक्टरों और चिकित्सा स्टाफ की कमी दूर करने तथा पशुओं का समय से टीकाकरण कराने को भी कहा गया। आशा-संगिनी, रसोइया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, खेत मजदूरों, किसानों और अन्य श्रमिकों की समस्याओं के शासन स्तर पर समाधान की मांग उठाई गई।
किसानों के मुद्दे
किसान सभा ने धान खरीद की समुचित व्यवस्था और एमएसपी सुनिश्चित करने, गन्ने का मूल्य 550 रुपये प्रति क्विंटल करने तथा आलू किसानों को घाटे से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की। ज्ञापन में ठाकुरद्वारा, कांठ और मुरादाबाद के रामगंगा क्षेत्र के कई गांवों में तेंदुओं के हमलों का भी मुद्दा उठाया गया। तेंदुए के हमलों में मृत लोगों के वारिसों को 50 लाख और घायलों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई।
ध्वस्तीकरण का मामला
वहीं, वामपंथी दलों एवं जनसंगठनों की समन्वय समिति की ओर से राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन में सहारनपुर में पांच सितंबर की भोर में अवैध बताकर गिराई गई मस्जिद का मामला उठाया गया। ज्ञापन में मुरादाबाद दिल्ली रोड स्थित मुस्तफा मस्जिद का मामला भी उठाया गया। समिति ने कहा कि सोशल मीडिया पर मस्जिद को लेकर चर्चा चल रही है और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू किए जाने की बात कही जा रही है। समिति ने मांग की कि सहारनपुर की तरह मस्जिद पक्ष की बात सुने बिना ध्वस्तीकरण न कराया जाए और दस्तावेजों व साक्ष्यों के आधार पर सौहार्दपूर्ण एवं सर्वमान्य समाधान निकाला जाए।
ज्ञापनों पर जिला सचिव त्रिमल सिंह, जिला कमेटी सदस्य वीर सिंह, ब्रांच सचिव सीपीआईएम डॉ. सईद सिद्दीकी, डीवाईएफआई अध्यक्ष शाहनवाज खान और जिला अध्यक्ष खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन शाकिर हुसैन आदि के हस्ताक्षर हैं।


