मनरेगा का झांसा देकर खुलवाते थे खाते, फिर इंस्टाग्राम हैक कर करते थे करोड़ों की ठगी
बलरामपुर में मनरेगा की योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर गरीब लोगों के बैंक खाते खुलवाने और उन्हें साइबर ठगी का शिकार बनाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

बलरामपुर, संवाददाता। मनरेगा में काम दिलाने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर गरीब और सीधे-सादे लोगों के बैंक खाते खुलवाए जाते थे। खाते की एटीएम, चेकबुक, पासबुक और मोबाइल सिम तक अपने कब्जे में लेने के बाद इन्हीं खातों को साइबर ठगी की रकम का ठिकाना बना दिया जाता था। इसके बाद इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर उसके दोस्तों और फॉलोअर्स को क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा दिया जाता और ठगी की रकम इन म्यूल खातों में मंगाकर दूसरे खातों में पहुंचा दी जाती थी। पचपेड़वा पुलिस और साइबर सेल ने ऐसे ही संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के हाथ अब तक सात बैंक खाते लगे हैं। इन खातों से देशभर में 15 ऑनलाइन साइबर शिकायतें जुड़ी मिली हैं, जबकि महज कम समय में करीब एक करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है। तीन खातों का बैंक विवरण पुलिस को मिल चुका है और बाकी खातों की जांच जारी है.
गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी
गिरफ्तार आरोपियों में सलमान खान पुत्र नूर आलम और अबु हमजा पुत्र अब्दुल मोबीन निवासी औरहवा, थाना पचपेड़वा शामिल हैं। दोनों पर पचपेड़वा थाने में धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
ठगी करने के तरीके
गैंग का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा देते थे। पीड़ितों को बताया जाता था कि मनरेगा का कार्ड बनवाकर उनके खाते में सरकारी पैसा आएगा। इसी बहाने आधार और पैन कार्ड लेकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे.
खाता खुलने के बाद असली खेल शुरू होता था। खाताधारक को एटीएम, पासबुक और चेकबुक बाद में मिलने की बात कहकर टाल दिया जाता था। खाते से लिंक मोबाइल नंबर भी आरोपी या गिरोह के दूसरे सदस्यों के इस्तेमाल में रहता था। यानी खाता किसी और के नाम और पूरा नियंत्रण साइबर ठगों के हाथ में.
सोशल मीडिया का उपयोग
पुलिस के मुताबिक गिरोह का दूसरा चरण सोशल मीडिया से जुड़ा था। साइबर ठग इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर उसके फॉलोअर्स और परिचितों को मैसेज भेजते थे। जान-पहचान वाले व्यक्ति के अकाउंट से संदेश आने के कारण पीड़ित आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे.
मैसेज में क्रिप्टो करेंसी में ट्रेडिंग और निवेश कर कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। पीड़ित के तैयार होते ही उसे रकम बताए गए बैंक खाते में भेजने के लिए कहा जाता। रकम खाते में पहुंचते ही उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस तरह ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसका स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती थी.
जांच और पुलिस की कार्रवाई
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बैंक खातों का इस्तेमाल सिर्फ रकम प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उसके सेटलमेंट नेटवर्क के तौर पर भी किया। साइबर ठगी से प्राप्त रकम पहले म्यूल खाते में आती और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। इससे रकम की वास्तविक उत्पत्ति तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था.
पुलिस को अब तक ऐसे सात खातों की जानकारी मिली है। इनमें तीन खातों का बैंक रिकॉर्ड प्राप्त हो चुका है। इन खातों में करीब एक करोड़ रुपये के लेनदेन और देशभर से 15 ऑनलाइन शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है.
एक पीड़ित की शिकायत से खुला बड़ा नेटवर्क
मामले की शुरुआत औरहवा निवासी कौशल खान की शिकायत से हुई। पीड़ित के अनुसार करीब दो वर्ष पहले सलमान खान और अबु हमजा ने उसे मनरेगा का लाभ दिलाने का झांसा दिया था। आरोपियों ने उसके दस्तावेज लेकर बैंक खाता खुलवा दिया। मुंबई से वापस लौटने के बाद जब पीड़ित बैंक पहुंचा तो उसे पता चला कि उसके खाते से साइबर ठगी की रकम का लेनदेन हुआ है और खाते के खिलाफ शिकायत दर्ज है.
इसके बाद पचपेड़वा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और जांच आगे बढ़ी तो मामला केवल एक खाते तक सीमित नहीं रहा। पुलिस को ऐसे कई खातों और देशभर की साइबर शिकायतों से जुड़े होने के संकेत मिले.
बैंकिंग ट्रेल की जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सातों खातों में कुल कितनी रकम आई, रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं। साथ ही उन लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है, जिनके दस्तावेजों का इस्तेमाल खाते खुलवाने में किया गया.
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक एवं साइबर क्राइम के नोडल अधिकारी विशाल पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी तुलसीपुर अभय प्रताप मल्ल के पर्यवेक्षण में कार्रवाई की गई। प्रभारी निरीक्षक पचपेड़वा ओपी चौहान के नेतृत्व में थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया.
बरामदगी में दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन, चेकबुक, जॉब कार्ड, पैन कार्ड, तीन आधार कार्ड और 9,050 रुपये नकद शामिल हैं.
पुलिस की नजर अब गिरोह के अगले कड़ियों पर
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की नजर अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बैंक खातों, मोबाइल सिम, सोशल मीडिया अकाउंट और रकम के अंतिम लाभार्थियों पर है। बैंकिंग ट्रेल से यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि करीब एक करोड़ रुपये के लेनदेन में कितनी रकम साइबर ठगी की थी और रकम आखिर किन लोगों तक पहुंची। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी.


