जांच में फेल हुई एंटीबायोटिक के 16 बैच, फर्म ब्लैक लिस्टेड
-सरकारी अस्पतालों को सप्लाई की गई सिप्रोफ्लॉक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड में मिली कमी

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं के 16 बैच जांच में फेल हो गए हैं। इस पर कार्रवाई करते हुए यूपी मेडिकल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) ने दवा आपूर्ति करने वाली फर्म को तीन साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया है। कॉरपोरेशन की मानें तो राजस्थान की विवेक फार्माकैम इंडिया ने एंटीबायोटिक दवा 'सिप्रोफ्लॉक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड 500 एमजी' टैबलेट की सप्लाई की थी。
जांच प्रक्रिया
अस्पतालों से जब इसके बारे में शिकायत मिली तो कॉरपोरेशन द्वारा जांच कराई गई। जांच में इसकी अलग-अलग 16 बैच की दवाएं 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' (एनएसक्यू) घोषित कर दी गई। यह सभी दवाएं अस्पतालों से वापस भी मंगा ली गई हैं। यूपीएमएससीएल की ओर से जारी आदेश के मुताबिक इस फर्म ने वर्ष 2024 और 2025 में प्रदेश के विभिन्न जिलों के ड्रग वेयर हाउसों में सिप्रोफ्लॉक्सासिन टैबलेट की आपूर्ति की थी। फर्म ने इन दवाओं की आपूर्ति के साथ एनएबीएल प्रमाणित लैब से गुणवत्ता जांच करायी थी। आपूर्ति के बाद कारपोरेशन की सूचीबद्ध लैब से भी जांच करायी गई। फिर दवाएं अस्पतालों को भेजी गईं थीं। सालभर बाद इन दवाओं की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिलने लगीं। जांच में दवा के 16 बैचों में गड़बड़ी मिली।
इन बैचों में मिली गड़बड़ी
जांच में सीपीटी24024, सीपीटी24097, सीपीटी25006, सीपीटी25018, सीपीटी25020, सीपीटी25066, सीपीटी24091, सीपीटी24105, सीपीटी24096, सीपीटी24076, सीपीटी25003, सीपीटी25037, सीपीटी25067, सीपीटी25083, सीपीटी25027 और सीपीटी25028 समेत कुल 16 बैच मानक पर खरे नहीं उतरे। तब कारपोरेशन की ओर से कंपनी को कई नोटिस जारी किए गए लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस बीच आई नमूनों की जांच रिपोर्ट में इस दवा के कई बैच डिसॉल्यूशन टेस्ट में फेल हो गए। इस जांच में तय होता है कि दवा शरीर में जाकर तय समय और मात्रा में घुलेगी या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार डिसॉल्यूशन में कमी सीधे तौर पर दवा के शरीर में असर को प्रभावित कर सकती है। जांच में सामने आया कि कई गोलियां स्ट्रिप से बाहर निकालते समय टूट या बिखर जा रही थीं। जबकि कुछ बैच में दवा की गुणवत्ता भी खराब मिली।


