अच्छी खबर...यूपी में अतिदोहित विकासखंड की संख्या 82 से घटकर 44 हुई
लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। जल संकट और गिरते भूजल स्तर की चुनौतियों से जूझने वाला यूपी

जल प्रबंधन में यूपी ने बड़ी छलांग लगाई है। भूजल दोहन में कमी आई है। यूपी में अतिदोहन विकासखंड की संख्या 82 से घटकर 44 तक पहुंची गई है। रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग जल संरक्षण के लिए 35 हजार से अधिक भवनों पर प्रणाली स्थापित की गई है। चेकडैम, अमृत सरोवर व वर्षा जल संचयन से करोड़ों लीटर भूजल रिचार्ज क्षमता बढ़ी है। कृषि विभाग ने 37 हजार से अधिक तालाब, लुघ सिंचाई विभाग ने 6 हजार से ज्यादा चेकडैम का निर्माण कराया गया है। जल संरक्षण बना जन आंदोलन, यूपी ने हासिल किया संयुक्त राष्ट्र का छठवां सतत विकास लक्ष्य हासिल किया है。
भूजल दोहन में कमी
वर्ष 2017 में प्रदेश में 82 अतिदोहित विकासखंड थे, जिनकी संख्या घटकर अब 44 रह गई है। वहीं सुरक्षित श्रेणी के विकासखंडों की संख्या 540 से बढ़कर 563 हो गई। यह परिवर्तन वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन व योजनाबद्ध कार्यों की वजह से संभव हो पाया है। इतना ही नहीं वर्ष 2017 में प्रदेश में जल दोहन की दर 71.26% से घटकर 70% हो गई है, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य का मानक है। यह उपलब्धि जल संरक्षण के लिए किए जा रहे सम्मलित प्रयासों से मिली है।
जल सरंक्षण की दिशा में उपलब्धियां
भूजल गर्भ विभाग के निदेशक डा. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, आधुनिक तकनीक के सम्मलित प्रयासों ने प्रदेश को जल सरंक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धियां दिलाई हैं। राज्य सरकार और विभाग के प्रयासों का सबसे बड़ा परिणाम भूजल पुनर्भरण में वृद्धि के रूप में सामने आया है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 69.91 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) था, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 73.39 बीसीएम हो गया। इसके अलावा ग्राम्य विकास विभाग द्वारा करीब 19,974 अमृत सरोवर विकसित किए गए जबकि कृषि विभाग ने 37,273 खेत तालाबों का निर्माण कराया। इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और कृषि उत्पादकता दोनों में सुधार हुआ। यह सभी प्रयास यूपी में भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण के लिए काफी अहम साबित हो रहे हैं।
अटल भूजल योजना के प्रभाव
2 मीटर तक बढ़ा भूजल स्तर
डा. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अटल भूजल योजना ने भी सकारात्मक बदलाव में अहम भूमिका निभाई। 26 विकासखंडों में ग्राम पंचायत आधारित वाटर सिक्योरिटी प्लान लागू किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्र अतिदोहित या सेमी-क्रिटिकल श्रेणी से सुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़े। एक स्वतंत्र अध्ययन में 550 ग्राम पंचायतों में से 303 पंचायतों में भूजल स्तर में 0.5 से 2 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया।


