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ऊंचाई वाले इलाकों में भी भारत का दबदबा; सैन्य बेड़े में शामिल होंगे स्ट्राइकर लड़ाकू वाहन! US से पेशकश

भारत के साथ 2+2 बातचीत के दौरान अमेरिका ने स्ट्राइकर बख्तरबंद लड़ाकू वाहन के को-प्रोडक्शन पर काफी जोर दिया था। यूएस के डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड जे ऑस्टिन की ओर से इसकी घोषणा भी की गई थी।

ऊंचाई वाले इलाकों में भी भारत का दबदबा; सैन्य बेड़े में शामिल होंगे स्ट्राइकर लड़ाकू वाहन! US से पेशकश
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 29 Nov 2023 06:00 PM
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अमेरिका ने भारत के लिए स्ट्राइकर बख्तरबंद लड़ाकू वाहन के एयर डिफेंस सिस्टम वर्जन की पेशकश की है। भारतीय सेना इसे दुश्मन के विमानों को मार गिराने के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात कर सकती है। रक्षा अधिकारियों ने ANI को बताया, 'अमेरिकियों ने इंडियन आर्मी को वायु रक्षा प्रणालियों से लैस स्ट्राइकर बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों की पेशकश रखी है। भारतीय संस्थाओं के साथ मिलकर इन वाहनों के प्रोडक्शन का भी प्रस्ताव है।' इस तरह डिफेंस सेक्टर के लिए यह पहल बहुत की खास हो जाती है।

भारत के साथ 2+2 बातचीत के दौरान अमेरिका ने स्ट्राइकर बख्तरबंद लड़ाकू वाहन के को-प्रोडक्शन पर जोर दिया था। यूएस के डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड जे ऑस्टिन की ओर से इसकी घोषणा भी की गई थी। यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका की ओर से भारत को स्ट्राइकर सिस्टम की बिक्री पर जोर दिया गया हो। इससे पहले भी हुईं कई हाई लेवल मीटिंग्स में इसे लेकर चर्चा हो चुकी है। रक्षा सूत्रों का कहना है कि भारत फिलहाल स्ट्राइकर वाहनों को लेकर इस अमेरिकी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इस मामले में अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है।

बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों के विकास में हुई काफी प्रगति
यूएस की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री ने पहिएदार बख्तरबंद प्लेटफॉर्म जैसे वाहनों सहित बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों के विकास में काफी प्रगति की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने प्राइवेट इंडस्ट्री के साथ मिलकर इस दिशा में खूब काम किया है। भारत ने इनमें से कुछ बख्तरबंद प्लेटफार्मों को लद्दाख सेक्टर जैसे अग्रिम क्षेत्रों में भी तैनात किया है। इससे चीनी सीमा पर आपातकालीन स्थितियों में सैनिकों को तुरंत रिस्पांस देने में मदद मिलेगी। मालूम हो कि भारत फोर्ज और टाटा सहित भारतीय निजी कंपनियों ने भी सिस्टम तैयार हैं और उन्हें फॉरवर्ड एरिया में तैनाती के लिए डिफेंस फोर्स को मुहैया भी कराया है।

16 सुपर रैपिड गन माउंट के लिए 2,956 करोड़ रुपये का करार
दूसरी ओर, रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए 16 सुपर रैपिड गन माउंट और संबंधित सहायक उपकरण खरीदने के लिए सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के साथ 2,956 करोड़ रुपये का करार किया है। एसआरजीएम एक मध्यम क्षमता की मिसाइल रोधी और विमान रोधी हथियार प्रणाली है जो प्रहार करने में निरंतरता व सटीकता देती है। मंत्रालय ने कहा कि उन्नत एसआरजीएम को भारतीय नौसेना के सेवारत और नवनिर्मित पोतों पर स्थापित किया जाएगा। बयान में कहा गया, 'रक्षा मंत्रालय ने भारत से खरीद श्रेणी के तहत भारतीय नौसेना के लिए 2956.89 करोड़ रुपये की लागत से डील की। इसके तहत 16 उन्नत सुपर रैपिड गन माउंट के साथ संबंधित सहायक उपकरण की खरीद को लेकर 28 नवंबर को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के साथ करार हुआ।'
(एजेंसी इनपुट के साथ)

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