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अमेरिका में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण पर टिकी भारत की निगाह

अमेरिका में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण पर भारत की निगाह टिकी हुई है। सभी तरह के घटनाक्रम की समीक्षा कूटनीतिक स्तर पर की जा रही है। अमेरिका में राजनीतिक रूप से स्थिति जल्द सामान्य होने और नए शासन के...

अमेरिका में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण पर टिकी भारत की निगाह
पंकज कुमार पाण्डेय,नई दिल्लीSat, 09 Jan 2021 12:43 AM
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अमेरिका में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण पर भारत की निगाह टिकी हुई है। सभी तरह के घटनाक्रम की समीक्षा कूटनीतिक स्तर पर की जा रही है। अमेरिका में राजनीतिक रूप से स्थिति जल्द सामान्य होने और नए शासन के कमान संभालने के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर बढ़ जाएगी। जानकारों का कहना है कि अमेरिका में मजबूत लोकतांत्रिक सत्ता भारत के हित मे है। बीते कुछ सालों मे भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक, व्यापारिक और सामरिक साझेदारी ने नया मुकाम हासिल किया है।

सामरिक मामलो के जानकार व विवेकानंद फाउंडेशन के सीनियर फेलो पी के मिश्रा ने कहा कि भारत और अमेरिका के सामरिक व रणनीतिक रिश्ते पहले की तुलना में काफी मजबूत हैं। अमेरिका ने पिछले कई सालों में भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका के विस्तार की पैरोकारी की है। हथियारों की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर है। निवेश लगातार बढ़ा है। खासतौर पर हिन्द प्रशांत छेत्र में भारत की भूमिका को अमेरिका मजबूती से स्वीकार करता है। मिश्र ने कहा भारत के लिए अमेरिका में स्थायित्व बहुत ही जरूरी है।

यूएन की स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर समर्थन के साथ संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद सहित विभिन्न मुद्दों पर भारत और अमेरिका साथ खड़े नजर आते हैं। चीन के दक्षिण चीन सागर में विस्तारवादी नीति के खिलाफ भारत का अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशो के साथ मजबूत गठजोड़ है। ऐसे में भारत चाहेगा कि किसी भी स्तर पर वैश्विक मोर्चेबंदी में ये गठजोड़ कमजोर न पड़े।

कूटनीतिक संपर्क कायम करेंगे भारत-अमेरिका
जानकारों का कहना है कि 20 जनवरी को बाइडन के शपथ लेने के बाद कई अहम बैठकों का दौर शुरू हो सकता है। भारत-अमेरिका क्वाड के जरिये कूटनीतिक संपर्क कायम कर सकते हैं। वही यूएन में भी दोनो देश अहम मसलों पर मिलकर काम करते नजर आएंगे। भारत को उम्मीद है कि अमेरिका के साथ पहले से चला आ रहा समन्वय बरकरार राहेगा। जानकारों का कहना है कि अमेरिका के लिए भारत एशिया में बहुत ही महत्वपूर्ण सहयोगी राष्ट्र है। इसलिए निश्चित ही नया प्रशासन इस इलाके को अपनी प्राथमिकता सूची में रखेगा। अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी भारत और अमेरिका की नजदीकी देखने को मिल सकती है।

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