क्रेडाई ने प्रकृति आधारित जल प्रबंधन तकनीकों पर जोर दिया
रांची में क्रेडाई चैप्टर द्वारा आयोजित कार्यशाला में शहरीकरण, जलसंकट और प्रदूषण पर चर्चा हुई। आईआईटी बॉम्बे के इंद्रकांत झा ने भविष्य के वाटर सेंसेटिव सिटीज के लिए कम ऊर्जा खपत वाली तकनीकों को अपनाने का सुझाव दिया। रियल एस्टेट डेवलपर्स और विशेषज्ञों ने झारखंड में ऐसी तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बताई।

रांची, संवाददाता। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलसंकट और प्रदूषण की चुनौतियों को लेकर रविवार को क्रेडाई रांची चैप्टर द्वारा बिल्डर्स कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें प्रकृति आधारित अपशिष्ट जल प्रबंधन और सतत शहरी विकास पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यशाला में साईन-आईआईती बॉम्बे के इंद्रकांत झा ने कहा कि भविष्य के वाटर सेंसेटिव सिटीजके निर्माण के लिए पारंपरिक ऊर्जा-प्रधान सीवेज ट्रीटमेंट प्रणालियों से आगे बढ़कर प्रकृति आधारित, कम ऊर्जा खपत वाली तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि आईआईटी बॉम्बे द्वारा विकसित तकनीक जैविक एवं प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सीवेज का प्रभावी उपचार करती है, जिससे ऊर्जा की खपत, कार्बन उत्सर्जन और परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
कार्यशाला में उपस्थित रियल एस्टेट डेवलपर्स, इंजीनियरों एवं पर्यावरण विशेषज्ञों ने झारखंड में नई आवासीय परियोजनाओं, टाउनशिप तथा नगर विकास योजनाओं में ऐसी प्रकृति-आधारित तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।


