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सवर्ण आरक्षण: शिक्षण संस्थानों में नए सत्र से 10 फीसदी सीटें बढ़ेंगी

सवर्ण आरक्षण(प्रतिकात्मक तस्वीर)

सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू होने के बाद उच्च शिक्षा संस्थानों की सीटों में 25 फीसदी का प्रस्तावित इजाफा एक बार में नहीं होगा। इसे तीन साल में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। जबकि इस साल संस्थानों में 10 फीसदी सीटें बढ़ने का ही अनुमान है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा, सीटें बढ़ाने के लिए न सिर्फ नए शिक्षकों की भर्ती करनी होती है, बल्कि नई कक्षाओं और फर्नीचर की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में एक बार में अपनी क्षमता 25 फीसदी बढ़ाना किसी भी संस्थान के लिए संभव नहीं होता। इसलिए उच्च शिक्षा संस्थानों की सीटों में प्रस्तावित 25 फीसदी इजाफा चरणों में किया जाएगा। 

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पहले चरण में आगामी अकादमिक सत्र में सीटों की संख्या में 10 फीसदी इजाफा करके आरक्षण लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद अगले दो साल में इसे 25 फीसदी तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि आरक्षण लागू होने से केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों पर पड़ने वाले आर्थिक भार का वहन केंद्र सरकार करेगी। इसके लिए आईआईटी, एनआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालय समेत सभी केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों से संभावित खर्चों की जानकारी मांगी गई है। 

इन संस्थानों को 31 जनवरी तक अपना जवाब मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को सौंपना है। राज्य सरकारों के अधीन आने वाले संस्थानों के बारे में पूछने पर अधिकारी ने कहा कि उन पर पड़ने वाला आर्थिक भार राज्य सरकारों को वहन करना पड़ेगा। 

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  • Web Title:upper caste reservation 10 percent seats will be increased from new sessions in educational institutions