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सवर्ण आरक्षण: अशोक गहलोत बोले- दस फीसदी नहीं 14 फीसदी कोटा दो

अशोक गहलोत (File Photo)

केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों [सामान्य वर्ग] के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में दस फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। केंद्र सरकार इसके लिए मंगलवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस संबंध में संवैधानिक संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कांग्रेस नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस फैसले से खुश नहीं नजर आ रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से 10 फीसदी की जगह 14 फीसदी आरक्षण देने की अपील की है।

अशोक गहलोत ने ट्विट किया, "पूरे देश के अंदर पहली सरकार हमारी थी 1998 में... हमारा EBC को 14% आरक्षण देने का प्रस्ताव था। सरकार को 10 नहीं, 14% की जो मांग थी उसके आधार पर ही फैसला करना चाहिए। संविधान में संशोधन करना चाहिए तत्काल, आरक्षण मिलना चाहिए। यह हमारी राजस्थान कांग्रेस सरकार की 20 साल पुरानी मांग थी।"

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कल पेश होगा विधेयक

सरकार इस बाबत मंगलवार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 [कांस्टीट्यूशन एमेंडमेंट बिल टू प्रोवाइड रिजर्वेशन टू इकोनॉमिक वीकर सेक्शन -2018] लोकसभा में लेकर आएगी। इस विधेयक के जरिए संविधान की धारा 15 व 16 में संशोधन किया जाएगा। सवर्णों को दिया जाने वाला आरक्षण मौजूदा 50 फीसदी आरक्षण से अलग होगा।

पात्रता के लिए जरूरी मानक:
सूत्रों ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को परिभाषित करने के लिए कई मानक तय किए जाएंगे। जिन परिवारों की आय आठ लाख रुपये सालाना से कम होगी वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दायरे में आएंगे। मूलत: यह ओबीसी आरक्षण में लागू क्रीमीलेयर की सीमा है, इसी को आधार बनाया गया है।  इसके अलावा जिनकी कृषि योग्य भूमि पांच एकड़ से कम होगी उन्हें इसके दायरे में रखा जाएगा। अन्य मानकों में पात्रता के लिए आवासीय घर [रेजीडेंशियल हाउस] एक हजार वर्ग फीट से कम होना चाहिए। अधिसूचित नगरपालिका में सौ गज से कम का प्लॉट होने पर ही आरक्षण का लाभ पा सकेंगे। गैर अधिसूचित नगरपालिका इलाके में आवासीय प्लॉट की सीमा 200 गज रखी गई है।

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संवैधानिक संशोधन जरूरी
सूत्रों का कहना है कि आरक्षण 50 फीसदी की सीमा से अलग होगा इसलिए संवैधानिक संशोधन किया जाएगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई से अधिक बहुमत से विधेयक पारित कराया जाना जरूरी है। संसद के दोनों सदनों मे पारित होने के बाद इस विधेयक पर कम से कम 50 फीसदी राज्यों में विधानसभा की मंजूरी जरूरी है।

सियासी रूप से गेमचेंजर हो सकता है फैसला
सरकार के सूत्र इस फैसले को सियासी रूप से गेमचेंजर मान रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले इस फैसले को तुरुप का पत्ता माना जा रहा है।

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  • Web Title:upper caste 10 percent reservation Ashok Gehlot says exceed limit quota