गौशालाएं बनेंगी आत्मनिर्भर, घायल गोवंश के उपचार को 24 घंटे एंबुलेंस
- एपीसी की अध्यक्षता में हुई बैठक में रखा गया प्रस्ताव - गोबर-गोमूत्र से

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता
यूपी में गौशालाओं को आत्मनिर्भरता का मॉडल बनाया जाएगा। गोबर-गोमूत्र से खाद व बॉयोगैस बनाने और पंचगव्य उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं घायल गोवंश को तत्काल उपचार मिले इसके लिए 24 घंटे एंबुलेंस सेवा भी शुरू की जाएगी। यही नहीं इनके सहित अन्य प्रस्तावों को भी जल्द अमली जामा पहनाया जाएगा।
गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना
गुरुवार को राजधानी स्थित पिकप भवन में उप्र गोसेवा आयोग व उप्र काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के संयुक्त सहयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) दीपक कुमार की अध्यक्षता में 25 सूत्रीय एजेंडे पर विस्तार से चर्चा की गई और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया। गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने गोवंश संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना में वर्तमान में एक से चार गोवंश सुपुर्द किए जाने की व्यवस्था है। अब इस सीमा को बढ़ाकर अधिकतम 10 गोवंश किया जाए। जिससे अधिक संख्या में इच्छुक कृषक व पशुपालक गोवंश संरक्षण से जुड़ सकेंगे। योजना की पहुंच भी बढ़ेगी। बैठक में आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने सड़क दुर्घटनाओं व अन्य कारणों से घायल गोवंशों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे समर्पित एंबुलेंस सेवा शुरू किए जाने का प्रस्ताव रखा। जिसके जरिए घायल गोवंशों को तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय या उपयुक्त चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जा सके। एपीसी दीपक कुमार ने आश्वासन दिया कि जल्द इन प्रस्तावों को संबंधित विभागों से समन्वय कर लागू कराने पर जोर दिया जाएगा.


