भंडाफोड़ः फर्जी लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाला गिरफ्तार
बिजनौर में उ.प्र. एसटीएफ और नहटौर पुलिस संयुक्त टीम ने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले इब्राहिम अंसारी को गिरफ्तार किया। वह ऑनलाइन प्रक्रिया में धोखा देकर लाइसेंस बनवा रहा था। आरोपी के पास से लैपटॉप, मोबाइल, आधार कार्ड, और अन्य सामान बरामद हुए हैं।

बिजनौर। उ.प्र. एसटीएफ बरेली और नहटौर पुलिस संयुक्त टीम ने फर्जी तरीके से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी अपने घर से लैपटॉप और इंटरनेट की मदद से उत्तर प्रदेश सहित महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल और अन्य राज्यों के लोगों के फर्जी तरीके से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस तैयार करता था। आरोपी के कब्जे से लाइसेंस बनाने में इस्तेमाल होने वाले लैपटॉप, मोबाइल, आधार कार्ड समेत अन्य सामान बरामद हुआ है। एसटीएफ को लंबे समय से विभिन्न राज्यों के लोगों के फर्जी तरीके से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने की सूचनाएं मिल रही थीं। एएसपी एसटीएफ फील्ड यूनिट बरेली अब्दुल कादिर के निर्देशन में उपनिरीक्षक अजीत कुमार और अमित कुमार के नेतृत्व में टीम की जांच के दौरान पता चला कि थाना नहटौर क्षेत्र के ग्राम फुलसंदा हीरा निवासी इब्राहिम अंसारी अपने घर से यह पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा है। सूचना की पुष्टि होने पर एसटीएफ और नहटौर पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार की शाम को उसके घर पर छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो लैपटॉप, दो एडॉप्टर, दो माउस, एक एयरटेल वाई-फाई राउटर, एक वीवो स्मार्टफोन, चार एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक तथा चार कूटरचित आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर थाना नहटौर में आरोपी के खिलाफ बीएनएस, आधार अधिनियम-2016 की धारा 36 तथा आईटी एक्ट की धारा 66सी और 66डी में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच करते हुए अन्य जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है.
वीडियो सत्यापन को करता था बायपास
पूछताछ में आरोपी इब्राहिम अंसारी ने बताया कि वह परिवहन विभाग की सारथी वेबसाइट पर लोगों के लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करता था। जिन लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती थी, उनसे रुपये लेकर पूरा आवेदन स्वंय करता था। आवेदन के बाद होने वाली ऑनलाइन परीक्षा भी वह खुद देता था। आरोपी ने खुलासा किया कि परीक्षा के दौरान कैमरे के सामने आवेदक की उपस्थिति अनिवार्य होती है। इसे दरकिनार करने के लिए वह ब्राउजर में टेम्पर मंकी एक्सटेंशन और विशेष जावा स्क्रिप्ट का उपयोग करता था। यह स्क्रिप्ट वीडियो सत्यापन प्रक्रिया को बायपास कर ई-केवाईसी के दौरान प्राप्त आधार कार्ड के फोटो के आधार पर परीक्षा का एक्सेस उपलब्ध करा देती थी। इसके बाद वह स्वयं परीक्षा पास कर लर्निंग लाइसेंस तैयार कर पीडीएफ व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदकों को भेज देता था.
कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार आरोपी लर्निंग लाइसेंस बनवाने की फीस यूपीआई के माध्यम से अपने खाते में लेता था। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि वह उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल समेत कई राज्यों के लोगों के लर्निंग लाइसेंस तैयार कर चुका है। पुलिस अब उसके नेटवर्क, बैंक खातों और अन्य संभावित सहयोगियों की जांच कर रही है.


