बिल्डर फ्लैट खरीदारों की रकम का गबन नहीं कर सकेंगे
उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने बिल्डरों द्वारा खरीदारों के आईएफएमएस फंड के दुरुपयोग को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इससे एक हजार से अधिक सोसाइटियों को लाभ मिलेगा। नई दरें निर्धारित की गई हैं और फंड का उपयोग केवल सीमित कार्यों के लिए किया जा सकेगा।

ग्रेटर नोएडा, आशीष धामा। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने फंड के उपयोग, हस्तांतरण, संग्रह और प्रबंधन की नई व्यवस्था लागू की है। इससे बिल्डर इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड में जमा खरीदारों के करोड़ों रुपये का गबन नहीं कर सकेंगे। इस व्यवस्था का नोएडा, ग्रेनो व यमुना सिटी की एक हजार से अधिक सोसाइटियों को लाभ मिलेगा। अधिकांश परियोजनाओं में फंड से संबंधित विवाद चल रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि फंड को लेकर यूपी रेरा ने एक्ट में 12वां संशोधन अधिसूचित किया है। इसे विनियम-47 के तहत जोड़ा गया है। ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में बिल्डरों को बिक्री, लीज या सब लीजडीड के पंजीकरण के समय आवंटियों से आईएफएमएस राशि लेनी होगी। इसे अलग से खोले गए किसी अनुसूचित बैंक के अकाउंट में जमा करना होगा। उसके बाद राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट योजना में निवेश करना होगा। साथ ही हैंडओवर के दौरान एओए या आरडब्ल्यूए को फंड हस्तांतरित कर देना होगा। रेरा ने फंड की दरें भी तय कर दी हैं। निवेश से पहले पात्र बैंक से प्रस्ताव लेने होंगे। जिस बैंक की योजना में सबसे अधिक ब्याज होगा, उसी में निवेश करना होगा। आईएफएमएस की दरें कम से कम 20 रुपये और अधिकतम 100 रुपये प्रति वर्ग फुट तय की गई हैं। इस व्यवस्था से नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वर्तमान में 1000 से अधिक सोसाइटियां हैं। ज्यादातर में फंड को लेकर विवाद चल रहा है। बिल्डर आईएफएमएस फंड को खर्च करते हैं। खर्चा कम होता है, लेकिन दिखाया अधिक जाता है। साथ ही एओए को हैंडओवर करने में भी आनाकानी करते हैं। फंड से मिलने वाले ब्याज का उपयोग बिल्डर कर रहे हैं। बिल्डरों की मनमानी के कारण एओए को कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है.
एओए या आरडब्ल्यूए को सौंपनी होगी धनराशि
एओए या आरडब्ल्यूए को हैंडओवर करने के दौरान बिल्डर को आईएफएमएस फंड से संबंधित ट्रांसफर स्टेटमेंट देना होगा। इसमें आईएफएमएस राशि, प्रत्येक यूनिट से ली रकम का विवरण, कटौती या समायोजन, खर्चे का ऑडिट रिकॉर्ड और हस्तांतरित की गई धनराशि की जानकारी दर्ज होगी। बिल्डर या एओए केवल सीमित कार्यों पर ही इस फंड को खर्च कर सकेंगे। इनमें कॉमन एरिया का संचालन, मरम्मत, रखरखाव और उपकरणों व सेवाओं का प्रतिस्थापन शामिल है। सभी निवासियों के सामूहिक हित में भी फंड खर्च किया जा सकता है.
बहुमंजिला ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए आईएफएमएस दरें
आवास के प्रकार- कारपेट एरिया(वर्ग मीटर)- चार्ज(रुपये/प्रति वर्ग फुट)
ईडब्ल्यूएस- 30-40- 20-30
एलआईजी- 35-45- 30-40
स्टूडियो अपार्टमेंट- 35-45- 30-40
एमआईजी- 45-90- 40-50
एचआईजी- 90-200- 50-60
लग्जरी- 200-300- 70-80
अल्ट्रा लग्जरी- 300 से अधिक- 90-100
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प्लॉटेड ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए तय दरें
100 वर्गमीटर से छोटे भूखंड- 20–30 रुपये प्रति वर्ग फुट
100 वर्गमीटर से बड़े भूखंड- 30–40 रुपये प्रति वर्ग फुट
व्यावसायिक परियोजनाए:
नॉन-सेंट्रल एसी प्रोजेक्ट- 40 रुपये प्रति वर्ग फुट
सेंट्रल एसी प्रोजेक्ट- 50 रुपये प्रति वर्ग फुट
प्लॉटेड ग्रुप कॉमर्शियल
100 वर्ग मीटर से छोटे भूखंड- 20–30 रुपये प्रति वर्ग फुट
100 वर्गमीटर से बड़े भूखंड- 30–40 रुपये प्रति वर्ग फुट
आईएफएमएस राशि मेंटेनेंस की अन्य राशि से अलग रखी जाएगी। सीए से ऑडिट कराना होगा। तीन माह पर ऑडिट रिपोर्ट एजीएम या ईजीबीएम में प्रस्तुत करना जरूरी होगा। इससे विवाद खत्म होंगे। आदेश लागू कर दिया गया है.
- संजय भूसरेड्डी, चेयरमैन, यूपी रेरा


