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लोकसभा चुनाव: आस्था से जुड़ी सीटों पर देवताओं के नाम वाले प्रत्याशियों ने बाजी मारी

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उत्तर-प्रदेश की कई ऐसी सीटें हैं जिन्हें भगवान और अवतारों के नाम से जाना जाता है। इन सीटों से जीतकर कई बार ऐसे लोग भी संसद पहुंचे हैं, जिनका नाम देवी-देवताओं के नामों से मिलते-जुलते रहे हैं। मथुरा से पहला चुनाव कांग्रेस के कृष्ण चन्द्र ने जीता था तो वाराणसी में राजाराम एवं शंकर नाम वाले प्रत्याशियों का कब्जा रहा। देवराहा बाबा के देवरिया में राम, नारायण और विश्वनाथ ने अपना परचम लहराया। मथुरा में गिरिराज पर्वत है और 1967 में वहां से गिरिराज शरण भी चुनाव जीत चुके हैं। प्रदेश में भगवान बुद्ध और उनसे जुड़ाव वाली तीन संसदीय सीटें हैं।

देवी-देवताओं के नामों और उनसे जुड़ाव वाली रामपुर, सीतापुर, फैजाबाद (अयोध्या), संत कबीरनगर, गौतमबुद्धनगर, कौशाम्बी, श्रावस्ती, वाराणसी, मथुरा तथा गोरखपुर आदि संसदीय सीटों के नाम शामिल हैं। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि ये प्रदेश की ऐसी लोकसभा सीटें हैं जो देश भर में अकसर किन्हीं न किन्हीं कारणों से चर्चा में रहती हैं। लिहाजा रामपुर हो या फैजाबाद (अयोध्या) या फिर वाराणसी, मथुरा और गोरखपुर, इन सीटों पर होने वाला चुनाव हमेशा दिलचस्प हो जाता है।

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लोकसभा चुनावों के आंकड़ों को देखें तो भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा संसदीय सीट से कांग्रेस के कृष्ण चन्द्र 1951 में चुनाव लड़े और जीत दर्ज की थी। भगवान कृष्ण और गिरिराज पर्वत से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गिरिराज नाम श्रीकृष्ण के साथ विशेष रूप से जुड़ा है। 1967 के संसदीय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी गिरिराज शरण मथुरा से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। यह भी मान्यता है कि भगवान शंकर की त्रिशूल पर बसी काशी अर्थात वाराणसी से भी कभी राम नाम के उम्मीदवार ने बाजी मारी तो शंकर प्रसाद जायसवाल ने 1996 से  1999 तक बाबा विश्वनाथ की इस पवित्र नगरी का संसद में नेतृत्व किया।  इसी प्रकार से देवों के नाम पर बसे देवरिया का भी अपना धार्मिक इतिहास रहा है। देवराहा बाबा को भी यहीं से प्रसिद्धि मिली थी। इस संसदीय क्षेत्र से प्रजातांत्रिक पार्टी के रामजी वर्मा 1957 में तो 1962 में कांग्रेस के विश्वनाथ राय चुनाव जीते थे। 1980 में कांग्रेस के ही रामायण राय यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।  

कौन सी सीटें 
श्रावस्ती: गौतम बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश यहीं दिए थे।

कौशाम्बी: गौतम बुद्ध के काल की प्रसिद्ध नगरी।

गौतम बुद्ध नगर: तथागत भगवान बुद्ध के नाम पर।

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कौन से सांसद रहे 

वाराणसी
- 1951 से 1962 तक कांग्रेस के रघुनाथ सिंह सांसद रहे।
- 1971 में कांग्रेस के ही राजाराम शास्त्री निर्वाचित हुए। 
- 1996, 97,98 एवं 98 से 99 में शंकर प्रसाद जायसवाल विजयी

मथुरा
- 1951 में कांग्रेस के कृष्ण चन्द्र (भगवान कृष्ण के नाम के) 
- 1967 निर्दलीय गिरिराज शरण (गिरिराज पर्वत) जीते
- 1991 में स्वामी साक्षी को सांसद बनने का मौका मिला

देवरिया
- 1951  कांग्रेस के सरयू प्रसाद ने सांसदी का सफर किया 
- 1957  प्रजा. सोश. पार्टी के रामजी वर्मा ने सीट जीती
- 1962  कांग्रेस के विश्वनाथ राय सांसद चुने गए।

कौशाम्बी 
कुश के पुत्र कौशाम्ब द्वारा बसाई गई यह प्राचीन नगरी गंगा-यमुना संगम के समीप है। इसे वत्सपट्टन भी कहते हैं। भगवान बुद्ध यहां बहुत दिनों तक रहे थे। यह बौद्धों का प्रमुख तीर्थ स्थान भी है। कनिंघम के अनुसार अब भी यहां भगवान बुद्ध काल का कोसम गांव और पुराने खंडहर मौजूद हैं।

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