UP Lok Sabha Election results 2019 Connection Between Ravi Kishan Victory From Gorakhpur and CM Yogi Adityanath patten - जानें मुख्‍यमंत्री योगी के 'खड़ाऊं' और रवि किशन की जीत का क्या है कनेक्‍शन DA Image

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जानें मुख्‍यमंत्री योगी के 'खड़ाऊं' और रवि किशन की जीत का क्या है कनेक्‍शन

ravi kishan

गोरखपुर से भाजपा के रवि किशन को जिस दिन भाजपा का टिकट मिला उसी दिन उन्‍होंने कहा कि वह महराज जी (मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ) का 'खड़ाऊं' लेकर गोरखपुर आए हैं। 18 अप्रैल को रोड शो के साथ धूमधाम से गोरखपुर पहुंचे तब भी मीडियाकर्मियों से पहले साक्षात्‍कार में भी उन्‍होंने यही बात दोहराई और इसके बाद हर सभा, हर प्रेस कांफ्रेंस, हर मीटिंग और हर जगह उन्‍होंने यही बात दोहराई। आज जब मतगणना शुरू होने से पहले उनसे नतीजों के बारे में पूछा गया तब भी उन्‍होंने 'महराज जी के खड़ाऊं' और उनके आशीर्वाद से एतिहासिक जीत का भरोसा जताया था। बता दें कि रवि किशन गोरखपुर सीट से चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने 301664 वोटों के अंतर से सपा उम्मीदवार को हराया है. 

दरअसल, गोरखपुर की जंग में रवि किशन का सबसे बड़ा सम्‍बल मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और उनकी रणनीति ही रही। रवि किशन के शब्‍दों में, 'इस चुनाव में महराज जी कृष्‍ण और मैं अर्जुन' की भूमिका में रहा। अर्जुन की तरह रवि किशन की आंखें यदि जीत के लक्ष्‍य पर टिकी रहीं तो मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने भी उनके रथ को गठबंधन और कांग्रेस के चक्रव्‍यूह से बचाते हुए अंतिम मुकाम तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वर्ष 2018 में हुए उपचुनाव में सपा के हाथों तीन दशक पुरानी गोरखपुर सीट खोने के बाद भाजपा भी तिलमिलाई बैठी थी। इस चुनाव में सबने पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन पूरे चुनावी अभियान की बागडोर सम्‍भाली खुद मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने। 

पांचवें-छठवें चरण के चुनाव से खाली होने के बाद तो उन्‍होंने गोरखपुर में डेरा ही डाल दिया। यहीं से देश और प्रदेश के दूसरे हिस्‍सों में जाकर रैलियां करते रहे। दिन में रैली,सभा, बैठक करने पश्चिम बंगाल, वाराणसी या किसी और क्षेत्र में जाते तो शाम को लौटकर गोरखपुर सीट की व्‍यूह रचना को जांचते-परखते। बूथ स्‍तर के एक-एक कार्यकर्ता, जिले के प्रमुख नेता और ग्राम प्रधान ही नहीं समाज के प्रबुद़ध जन, सिंधि समाज, बंगाली समाज, व्‍यापारी समाज, छात्र-युवा सहित तमाम वर्गों के बीच मुख्‍यमंत्री खुद गए। इन सभी के अलग-अलग सम्‍मेलन हुए। कहीं निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को सहेजा तो कहीं रूठों को मनाया। धीरे-धीरे करके सबको उन्‍होंने एक लक्ष्‍य से जोड़ दिया। फिर 19 मई के लिए उन्‍होंने अपनों के बीच जो संदेश दिया उसका असर यह पड़ा कि शहर से लेकर गांवों तक सुबह-सुबह ही मतदान केंद्रों पर भाजपा की विचारधारा को पसंद करने वाले वोटरों की लाइन लग गई। गोरखपुर सदर सीट पर 2014 के 54.64  प्रतिशत और उपचुनाव के 48.87 प्रतिशत के मुकाबले इस बार करीब-करीब 60 प्रतिशत मतदान के रूप में उनकी कोशिशों का असर नज़र आया। इस बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को रविकिशन के पक्ष में माना जा रहा था। आज की मतगणना ने इसे प्रमाणित भी कर दिया। 

1989 से जो थी गोरक्षपीठ की सीट उस फिर लहराया भगवा
गोरखपुर सीट 1989 से गोरक्षपीठ के कब्‍जे में थी। मौजूदा मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ 1998 से 2014 तक लगातार यहां से सांसद रहे। इसके पहले उनके गुरु महंत अवेद्यनाथ यहां से जीतते रहे थे। लेकिन 2017 में मुख्‍यमंत्री बनने के बाद उन्‍होंने इस सीट से इस्‍तीफा दे दिया। मार्च 2018 में चुनाव हुए तो सपा ने प्रवीण निषाद को भाजपा के उपेन्‍द्र शुक्‍ल के मुकाबले मैदान में उतार दिया। बसपा ने ऐन चुनाव से पहले सपा को समर्थन दे दिया। बदले हुए राजनीतिक परिदृश्‍य और समीकरणों की भाजपा कोई काट निकालती इसके पहले ही चुनाव नतीजे आ गए। उपेन्‍द्र शुक्‍ल को 21881 मतों से हरा कर प्रवीण निषाद सपा के सांसद बन गए। इस हार ने भाजपा और खासकर गोरक्षपीठ के समर्थकों को हिलाकर रख दिया था। यही वजह रही कि इस बार शुरू से ही दोनों अपनी जीत की रणनीति को लेकर खासे सतर्क दिखे।

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