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5 अप्रैल, 2020|2:46|IST

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Ayodhya Verdict: अयोध्या फैसले पर CM योगी आदित्यनाथ बोले- भारत ने लोकतंत्र की मजबूती का संदेश दिया

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले स्वागत किया। सीएम योगी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी ने दिल से स्वीकार किया है। भारत ने लोकतंत्र की मजबूती का संदेश दिया। नकारात्मकता के लिए हमारे यहां कोई जगह नहीं है। 

योगी आदित्यनाथ ने सुप्रीम कोर्ट के जजों का अभिनंदन करते हुए कहा कि हर कठिन समस्या का हल न्यायपालिका में है। मन में कटुता है तो त्याग देने का दिन है। उन्होंने कहा कि इस विवाद के समापन पर सभी पक्षों को बधाई देता हूं, यूपी के लिए इसके काफी मायने। सीएम ने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला होगा वह हमें मान्य होगा, यह फैसला कुछ संदेश दे रहा। उन्होंने कहा कि जब मैं सीएम बना था तो अयोध्या गया, वहां मुझे अयोध्या की उपेक्षा महसूस हुई।

गौरतलब रहे कि संविधान पीठ ने अपने 1045 पन्नों के फैसले में कहा कि नयी मस्जिद का निर्माण 'प्रमुख स्थल पर किया जाना चाहिए। साथ ही उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए जिसके प्रति हिन्दुओं की यह आस्था है कि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ था। इस स्थान पर 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद थी जिसे कार सेवकों ने छह दिसंबर, 1992 को गिरा दिया था। विवादित स्थल गिराये जाने की घटना के बाद देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क गये थे। पीठ ने कहा कि 2.77 एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला विराजमान को सौंप दिया जाये, जो इस मामले में एक वादकारी हैं। हालांकि यह भूमि केन्द्र सरकार के रिसीवर के कब्जे में ही रहेगी। 

न्यायालय ने कहा कि हिन्दू यह साबित करने में सफल रहे हैं कि विवादित ढांचे के बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था और उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्योध्या विवाद में अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। संविधान पीठ ने यह माना कि विवादित स्थल के बाहरी बरामदे में हिन्दुओं द्वारा व्यापक रूप से पूजा अर्चना की जाती रही है और साक्ष्यों से पता चलता है कि मस्जिद में शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते थे जो इस बात का सूचक है कि उन्होंने इस स्थान पर कब्जा छोड़ा नहीं था। शीर्ष अदालत ने कहा कि मस्जिद में नमाज पढ़ने में बाधा डाले जाने के बावजूद साक्ष्य इस बात के सूचक है कि वहां नमाज पढ़ना बंद नहीं हुआ था।

संविधान पीठ ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे मिली संरचना इस्लामिक नहीं थी लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह साबित नहीं किया कि क्या मस्जिद निर्माण के लिये मंदिर गिराया गया था। न्यायालय ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों को महज राय बताना इस संस्था के साथ अन्याय होगा। न्यायालय ने कहा कि हिन्दू विवादित स्थल को ही भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं और मुस्लिम भी इस स्थान के बारे में यही कहते हैं। पीठ ने कहा कि विवादित ढांचे में ही भगवान राम का जन्म होने के बारे में हिन्दुओं की आस्था अविवादित है। यही नहीं, सीता रसोई, राम चबूतरा और भण्डार गृह की उपस्थिति इस स्थान के धार्मिक तथ्य की गवाह हैं।

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  • Web Title:UP CM Yogi Adityanath on supreme court ayodhya verdict