ट्रेंडिंग न्यूज़

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ देशचुनाव में रैलियों पर बैन से बीजेपी को नफा, जानें कैसे डिजिटल प्रचार में बीजेपी मार सकती है बाजी

चुनाव में रैलियों पर बैन से बीजेपी को नफा, जानें कैसे डिजिटल प्रचार में बीजेपी मार सकती है बाजी

कोरोना महामारी के साये में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के ऐलान होते ही चुनाव आयोग ने रैलियों और रोड शो पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस कारण से यह चुनाव डिजिटल चुनाव होगा। इस ऐलान के साथ ही कुछ...

चुनाव में रैलियों पर बैन से बीजेपी को नफा, जानें कैसे डिजिटल प्रचार में बीजेपी मार सकती है बाजी
Gauravलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीSun, 09 Jan 2022 08:30 AM

इस खबर को सुनें

0:00
/

कोरोना महामारी के साये में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के ऐलान होते ही चुनाव आयोग ने रैलियों और रोड शो पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस कारण से यह चुनाव डिजिटल चुनाव होगा। इस ऐलान के साथ ही कुछ राजनीतिक दलों ने जहां इस फैसले का स्वागत किया है तो वहीं कुछ दल पशोपेश में पड़ गए हैं। इसी बीच चुनाव विशेषज्ञ राजनीतिक दलों के नफा नुकसान का आंकलन करने में जुट गए हैं कि डिजिटल प्रचार में कौन से दल को बाकी दल से अधिक फायदा हो सकता है।

दरअसल, कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही वर्चुअल तरीके से लोगों तक पहुंच बनाने और प्रचार कराने को लेकर राजनीतिक दलों पर दबाव बढ़ गया है। इन तैयारियों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ पार्टी संसाधनों की भी जरूरत होगी। चुनाव एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे में बीजेपी को प्रचार के मामले में अन्य राजनीतिक दलों से बढ़त मिल सकती है और इसके कई कारण हैं। इतना ही नहीं चुनाव आयोग के इस ऐलान के बाद तुरंत ही बीजेपी का डिजिटल विभाग एकदम सक्रिय हो गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने एक रिपोर्ट में बीजेपी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के हवाले से बताया कि बीजेपी कोरोना के प्रकोप के बाद से ही पिछले दो वर्षों से डिजिटल अभियानों की तैयारी कर रही थी। बलूनी ने बताया कि जमीनी स्तर पर हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को नवीनतम तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचने के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी कोरोना के दिशानिर्देशों का पालन करेगी। 

बलूनी ने यह भी बताया कि बूथ स्तर सहित पार्टी के सभी कार्यालयों में वर्चुअल कैंपेन के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा एक तथ्य यह भी है कि अन्य पार्टियों की अपेक्षा बीजेपी चुनाव प्रचार पहले ही शुरू कर चुकी है। उत्तर प्रदेश में पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई बड़े नेता चुनाव की तारीख की घोषणा के लगभग एक महीने से ही पूरे यूपी में रैलियां और अन्य कार्यक्रम कर रहे हैं।

उधर बीजेपी ने हाल ही में अपनी समीक्षा बैठकों में भी पार्टी की IT टीम को तैयार रहने के लिए कहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी ने डिजिटल अभियान की तैयारी कोरोना की पहली लहर से कर दी थी जबकि दूसरी लहर में इसको तेज कर दिया था। हर जिले में बीजेपी कार्यालय बनाने के साथ ही उसमें IT विभाग का कमरा भी निर्धारित कर दिया गया था, जहां पर पार्टी के अपने कार्यालय नहीं थे, वहां पर इसकी तैयारी शुरू कर दी गई थी।

इसके उलट चुनाव आयोग के ऐलान के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि बीजेपी के लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कब्जा जमाए हुए हैं। अखिलेश ने कहा कि जिन वर्कर के पास संसाधन नहीं है वो वर्चुअल रैली कैसे करेंगे। जो छोटी पार्टियां हैं उन्हें कैसे स्पेस मिलेगा।

बता दें कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव तारीखों का ऐलान हो चुका है। कोरोना की चुनौतियां, ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग ने 10 फरवरी से चुनाव की घोषणा की है। चुनाव के तारीखों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता भी लागू हो चुकी है।

epaper