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मणिपुर में अशांति और मिजोरम में शरणार्थी संकट, म्यांमार में विद्रोह से बढ़ेंगी मुश्किलें; भारत के लिए क्या मायने

म्यांमार में विद्रोह के चलते मिजोरम में हजारों शरणार्थियों की आमद के अलावा, भारत के उत्तर-पूर्व में सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव फैलने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

मणिपुर में अशांति और मिजोरम में शरणार्थी संकट, म्यांमार में विद्रोह से बढ़ेंगी मुश्किलें; भारत के लिए क्या मायने
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 15 Nov 2023 01:15 AM
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हाल के दिनों में म्यांमार की सेना और स्थानीय ताकतों से साथ जारी गतिरोध भारत के पूर्वोत्तर सीमा के लिए खास चुनौती बना हुआ है। पूर्वोत्तर राज्यों - खास तौर पर मणिपुर और मिजोरम के म्यांमार से सीमा साझा करने के कारण विदेशी विद्रोह का असर पड़ सकता है। हाल दिनों में म्यांमार की सेना और विद्रोही गुटों के बीच जारी गतिरोध की बात करें तो थ्री ब्रदरहुड एलायंस ने चीन की सीमा से लगे पूर्वोत्तर शान राज्य में ऑपरेशन 1027 लॉन्च किया, जिससे भारी अशांति फैली थी। थ्री ब्रदरहुड एलायंस में म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस आर्मी (MNDAA), अराकान आर्मी और ता'आंग नेशनल लिबरेशन आर्मी (TNLA) शामिल रहे। इन घटनाओं के कारण मिजोरम में शरणार्थी संकट के साथ-साथ मणिपुर की स्थिति पर इसका असर पड़ सकता है, आइए समझते हैं। 

म्यांमार में अन्य छोटे समूहों के समर्थन से थ्री ब्रदरहुड एलायंस ने कथित तौर पर 135 से अधिक सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया है, हथियारों और गोला-बारूद के बड़े भंडार को जब्त कर लिया है और चीन के साथ व्यापार मार्गों पर नियंत्रण कर लिया है। मणिपुर में मौजूदा अशांति को ध्यान में रखें तो म्यांमार की सीमा से उठ रहे विद्रोह आग में घी की तरह काम कर सकते हैं।  

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
हाल ही में म्यांमार से मिजोरम में हजारों शरणार्थियों की आमद के अलावा, भारत के उत्तर-पूर्व में सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव फैलने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। म्यांमार के चिन जातीय समूह का मणिपुर में कुकी के साथ मजबूत संबंध है, और मणिपुर के कई मैतेई उग्रवादी समूहों की म्यांमार के सागांग क्षेत्र में मौजूदगी है। माना जाता है कि उन्हें जुंटा का संरक्षण प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर मणिपुर की स्थिति पर पड़ सकता है।

म्यांमार के विद्रोही समूहों के साथ राष्ट्रव्यापी युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर करने की आठवीं वर्षगांठ पर एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जब भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिस्री नेपीताव गए थे, तब उन्होंने कहा था कि जातीय संघर्षों को हल करने के लिए समझौते को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हालांकि, हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि शांति का पथ चुनौतियों से भरा रहा है। रास्ते में असफलताएं आई हैं, और म्यांमार में उभरते राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।"

खुली सीमा पर चाहते हैं नियंत्रण
म्यांमार के चिन राज्य में भीषण लड़ाई के बीच विद्रोही और तख्तापलट करने वाली सेना के बीच कई महीनों से घमासान जारी है। हवाई हमलों के बाद बीते 24 घंटे के दौरान मिजोरम की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब दो हजार लोग भारत आ गए हैं। इस बीच एक विद्रोही कमांडर ने कहा है कि म्यांमार के चिन राज्य में जुंटा विरोधी लड़ाकों ने पहाड़ी सीमा पर दो सैन्य चौकियों को अपने कब्जे में ले लिया है। विद्रोहियों के लिए ये बड़ी कामयाबी है जो ताकतवर सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं। विद्रोही नेता ने कहा कि वे चौकियों पर कब्जा करने के बाद भारत के साथ खुली सीमा के हिस्से पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। 

इस सप्ताह पश्चिमी राज्यों रखाइन और चिन में दो नए मोर्चों पर भी लड़ाई छिड़ गई, जिससे हजारों लोग मिजोरम की ओर भाग गए। सुई खार ने कहा कि लगभग 80 विद्रोहियों ने सोमवार सुबह लगभग 4 बजे चिन में रिख्वादार और खावमावी सैन्य शिविरों पर हमला किया, कई घंटों की लड़ाई के बाद अंततः दोनों चौकियों पर नियंत्रण कर लिया। पुलिस अधिकारी लालमलसावमा हनामटे ने कहा कि विद्रोही हमलों के बाद, म्यांमार के 43 सैनिक भारतीय सीमा में आ गए और उन्हें मिजोरम में सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया।

एक सुरक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उनमें से लगभग 39 सैनिकों को भारतीय बलों द्वारा पड़ोसी मणिपुर में एक सीमा पार बिंदु पर ले जाया गया और म्यांमार के अधिकारियों को सौंप दिया गया। गृह मंत्रालय ने कोई बयान जारी नहीं किया है। सुई खार और चिन मानवाधिकार संगठन ने कहा कि उनका मानना है कि इनमें से कुछ सैनिक नागरिकों के खिलाफ अत्याचार में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने विस्तार से नहीं बताया। सुई खार ने कहा कि चिन विद्रोही अब भारत-म्यांमार सीमा पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश करेंगे, जहां म्यांमार सेना के दो और शिविर हैं।

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