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OTP से नहीं होती अनलॉक, EVM हैकिंग के दावों पर विपक्ष को चुनाव आयोग का जवाब

तमाम विपक्षी पार्टियों ने एक बार फिर से ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, जिसे लेकर अब चुनाव आयोग ने अपनी सफाई पेश की है।

OTP से नहीं होती अनलॉक, EVM हैकिंग के दावों पर विपक्ष को चुनाव आयोग का जवाब
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईSun, 16 Jun 2024 06:22 PM
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लोकसभा चुनाव 2024 के बाद एक बार फिर ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तमाम विपक्षी पार्टियों ने एक बार फिर से ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए आगामी सभी चुनाव मतपत्रों के जरिये कराने की मांग की। इस पर अब चुनाव आयोग ने अपनी सफाई पेश की है। मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट की निर्वाचन अधिकारी वंदना सूर्यवंशी ने कहा कि ईवीएम ‘स्टैंडअलोन’ (स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाली) प्रणाली है, इसे अनलॉक करने के लिए ओटीपी की जरूरत नहीं है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यवंशी ने कहा, "आज जो खबर आई उस को लेकर कुछ लोगों ने ट्वीट किए। ईवीएम को अनलॉक करने के लिए कोई OTP नहीं लगता है। ईवीएम डिवाइस किसी से कनेक्ट नहीं रहता, अखबार द्वारा पूरी तरह से गलत खबर चलाई गई है। ईवीएम स्टैंडअलोन सिस्टम है। खबर पूरी तरह से गलत है हमने पेपर को नोटिस इशू किया है। 499 आईपीसी के तहत मानहानि का केस भी किया गया है।

ईवीएम हैकिंग को लेकर क्या बोले अखिलेश यावद
इससे पहले सपा प्रमुख यादव ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने एक पोस्ट में कहा, “ ‘टेक्नॉलजी’ समस्याओं को दूर करने के लिए होती है, अगर वही मुश्किलों की वजह बन जाए, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।” यादव ने इसी पोस्ट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा, “आज जब विश्व के कई चुनावों में ईवीएम को लेकर गड़बड़ी की आशंका जाहिर की जा रही है और दुनिया के जाने-माने प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ (टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स) ईवीएम में हेराफेरी के खतरे की ओर खुलेआम लिख रहे हैं, तो फिर ईवीएम के इस्तेमाल की जिद के पीछे की वजह क्या है, ये बात भाजपाई साफ करें।”

उन्होंने कहा, “आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की अपनी मांग को हम फिर दोहराते हैं।” यादव पहले भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं।

राहुल गांधी भी उठा चुके हैं सवाल
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) एक ब्लैक बॉक्स है, जिसकी जांच करने की किसी को इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर ‘‘गंभीर चिंताएं’’ जताई जा रही हैं।

गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘जब संस्थाओं में जवाबदेही ही नहीं होती तो लोकतंत्र दिखावा बन कर रह जाता है और धांधली की आशंका बढ़ जाती है।’’ इस पोस्ट के साथ गांधी ने एक खबर भी साझा कि जिसमें दावा किया गया कि मुंबई की उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट से 48 वोट से जीत दर्ज करने वाले शिवसेना के उम्मीदवार के एक रिश्तेदार के पास एक ऐसा फोन है जिससे ईवीएम में छेड़छाड़ संभव थी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर एलन मस्क की उस पोस्ट को भी साझा किया जिसमें मस्क ने ईवीएम को हटाने की बात कही थी। मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा था, ‘‘हमें ईवीएम को खत्म कर देना चाहिए। मुनष्यों या कृत्रिम मेधा (एआई) द्वारा हैक किए जाने का जोखिम, हालांकि छोटा है, फिर भी बहुत अधिक है।’’ विपक्षी दल पिछले कुछ समय से ईवीएम पर चिंता जताते रहे हैं और उसने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर ‘वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपैट) पर्चियों का शत प्रतिशत मिलान करने की अपील की की थी लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

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