पढ़ाई कर भविष्य बनाना था, विवि में आकर बर्बाद हो गया

हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर में तीन साल बाद भी प्रैक्टिकल के अंक नहीं चढ़ने से छात्राओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। रागिनी जैसे छात्राएं विवि की लापरवाही के कारण स्नातक नहीं कर पा रही हैं। आधा दर्जन छात्रों ने बताया कि महीनों से अंकपत्र के लिए चक्कर काट रहे हैं। विवि का छात्र संवाद भी केवल खानापूर्ति बन गया है।

पढ़ाई कर भविष्य बनाना था, विवि में आकर बर्बाद हो गया

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। तीन साल बाद भी प्रैक्टिकल का अंक नहीं चढ़ा। स्नातक की परीक्षा के बाद भी भविष्य बर्बाद है। ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जिन्हें सात साल बाद भी अंकपत्र नहीं मिल पाया है। तीन साल बाद भी प्रैक्टिकल का अंक नहीं चढ़ने के कारण छात्रा ना स्नातक कर पाई और ना आगे नामांकन ले पा रही है। सोमवार को बीआरएबीयू के छात्र संवाद में आरबीबीएम कॉलेज की छात्रा रागिनी फूट फूटकर रो पड़ी। पारू से विवि तक का दर्जन बार चक्कर लगा चुकी रागिनी ने कहा कि भविष्य बनाने के लिए पढ़ाई की थी, लेकिन विवि में आकर भविष्य ही बर्बाद हो गया।

छात्राओं की समस्याएं

विवि की लापरवाही से छात्रा थर्ड ईयर की परीक्षा देने के बावजूद छह साल में भी स्नातक नहीं कर पाई है। यह एक मामला नहीं था, बल्कि आधा दर्जन से अधिक मामले छात्र संवाद में आए, जो महीनों से चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे दर्जनों छात्र-छात्राएं विवि का चक्कर काट रहे हैं। छात्र-छात्ताओं का कहना था कि छात्र संवाद भी केवल खानापूर्ति ही बन गया है।

मार्कशीट की देरी

कर्मचारी कहते टीआर लाओ, कॉलेज कहता है ही नहीं

छात्र संवाद में आए एक छात्र ने कहा कि 7 साल बाद भी मार्कशीट नहीं मिली है। कॉलेज और विवि का चक्कर लगाकर थक चुके हैं। आरबीबीएम कॉलेज की रागिनी ने कहा कि पेंडिंग सुधार के लिए आवेदन दी थी। सत्र 2021-24 में नामांकन लिया था। पार्ट टू की परीक्षा 2023 में दी। अनुपस्थित बताकर रिजल्ट पेंडिंग कर दिया गया है। अंकपत्र पर भी अनुपस्थित दिखाया गया है। आजतक रिजल्ट में सुधार नहीं हुआ। पारू घर है। पिता किसान हैं।

छात्र संवाद में स्थिति

मोतिहारी इवनिंग कॉलेज से सत्र 2016-19 में स्नातक पास छात्र विकास कुमार 7 साल से कॉलेज और विवि का चक्कर लगा रहे। छात्र संवाद में विकास ने मार्कशीट जारी करने के लिए आवेदन दिया था। कर्मचारी कहते हैं कि टीआर लेकर आओ और कॉलेज कहता कि टीआर उपलब्ध ही नहीं है। कॉलेज के कर्मचारी हर बार विश्वविद्यालय भेज देते हैं। एक छात्रा ने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के पोर्टल पर नाम सुधार के लिए आवेदन दिया। इस मौके पर विवि के अधिकारी मौजूद थे।

सामान्य प्रश्न

छात्राओं को मार्कशीट क्यों नहीं मिल रही है?
छात्राओं को मार्कशीट विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण नहीं मिल रही है।

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