60 साल से गुप्ता परिवार के प्रतिष्ठान पर रखा जा रहा ताजिया, मिसाल बना भाईचारा
कायमगंज के कुंआखेड़ा तराई क्षेत्र में मोहर्रम के अवसर पर ताजिया रखने की परंपरा 60 वर्षों से चली आ रही है। यहां मुस्लिम समाज श्रद्धा से ताजिए की याद में मातम कर रहा है। यह आयोजन क्षेत्र में भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
कायमगंज, संवाददाता । कुंआखेड़ा तराई क्षेत्र में मोहर्रम के अवसर पर सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। यहां व्यापारी जितेंद्र गुप्ता के प्रतिष्ठान पर पिछले करीब छह दशकों से ताजिया रखा जा रहा है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी पूरा परिवार श्रद्धा और सम्मान के साथ निभा रहा है। जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि उनके यहां लगभग 60 वर्षों से लगातार ताजिया रखा जा रहा है। इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार ताजिया स्थापित किया गया, जहां देर शाम मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में जुटे।
समारोह में भागीदारी
अकीदतमंदों ने मातम कर कर्बला के शहीदों को याद किया तथा उनकी कुर्बानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस दौरान बाबर खां, परवेज नायर बन्ना, ताहिर खान समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। आयोजन में शामिल लोगों के बीच शरबत वितरित किया गया। उपस्थित लोगों ने इसे क्षेत्र में आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की मजबूत परंपरा का प्रतीक बताया।
ताजिए का जुलूस
मोहर्रम के मुख्य दिन क्षेत्र के विभिन्न गांवों से निकलने वाले ताजिए पारंपरिक जुलूस के साथ कर्बला ले जाए जाएंगे, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। जुलूस में दोसपुर, खजुरिया, कुआंखेड़ा और बुनियादपुर सहित कई गांवों के ताजिए शामिल होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सौहार्द का संदेश देती आ रही है। मोहर्रम के अवसर पर निकलने वाला यह जुलूस हर वर्ष सामाजिक समरसता और भाईचारे की मिसाल बनता है।


