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रेडियो पर स्मृति ईरानी का नया शो, बता रहीं हौसलों को उड़ान देने वाली महिला सशक्तिकरण की कहानी

Smriti Irani Radio Show: दूसरे एपिसोड का विषय 'खेलों में उपलब्धियां' था, जिसमें ईरानी ने दीपा मलिक, अंकुर धामा, पूनम बेनीवाल और जफर इकबाल जैसी खिलाड़ियों, कोचों और पैरा-एथलीटों का इन्टरव्यू लिया।

रेडियो पर स्मृति ईरानी का नया शो, बता रहीं हौसलों को उड़ान देने वाली महिला सशक्तिकरण की कहानी
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 26 Nov 2023 07:02 AM
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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आकाशवाणी पर एक रेडियो शो की मेजबानी शुरू की है। उस कार्यक्रम में वह महिला सशक्तिकरण से जुड़ी कहानियां पेश करती हैं। 13 एपिसोड वाले इस साप्ताहिक कार्यक्रम का नाम 'नई सोच नई कहानी- स्मृति ईरानी के साथ एक रेडियो यात्रा' रखा गया है। इसे हाल ही में आकाशवाणी पर लॉन्च किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों की उन विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में बात करना है, जिसके जरिए देशभर में महिलाओं का जीवन प्रभावित हुआ है और उनमें एक नया बदलाव आया है। 15 नवंबर को प्रसारित हो चुके एक घंटे के शो के अब तक दो एपिसोड जारी किए जा चुके हैं।

'महिलाएं और उद्यम' नामक पहले एपिसोड में, महिला एवं बाल विकास मंत्री ईरानी ने एमएसएमई और कौशल विकास के सचिवों के साथ-साथ पीएम स्वनिधि योजना, पीएम मुद्रा योजना और स्टार्टअप इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ भी बातचीत की।

दूसरे एपिसोड का विषय 'खेलों में उपलब्धियां' था, जिसमें ईरानी ने दीपा मलिक, अंकुर धामा, पूनम बेनीवाल और जफर इकबाल जैसी खिलाड़ियों, कोचों और पैरा-एथलीटों का इन्टरव्यू लिया। केंद्रीय मंत्री की पहल पर शुरू किया गया यह कार्यक्रम बुधवार को रात 9 बजे आकाशवाणी के रेडियो चैनल और उसके वेब पोर्टल पर प्रसारित किया जाता है।

बता दें कि दीपा मलिक ने अब तक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 68 स्वर्ण पदक के साथ 5 रजत पदक और राष्ट्रीय स्तर पर 23 मेडल जीतने के अलावा 4 बार लिम्का ऑफ वर्ल्ड में नाम दर्ज कराया है। दीपा मलिक के साथ ही ईरानी ने इस एपिसोड में जफर इकबाल से भी बात की जिन्होंने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत कर अलग इतिहास रचा है।

स्मृति ईरानी से बातचीत में दीपा मलिक ने अपने संघर्ष के बारे में बताया कि कैसे बचपन से पैरालिसिस का अटैक झेलते हुए और बाद में अपनी बेटी के लकवे से शिकार होने के कारण दिव्यांग हो जाने, जैसी तमाम समस्याओं का सामना करते हुए अपने अंदर के जज़्बे को उन्होंने बरकरार रखा और डटी रहीं। समाज में एक अपंग मां की भूमिका अदा करते हुए एक दिव्यांग बेटी को पालने वाली और उसी दौरान खुद ट्यूमर का शिकार हो जाने के बाद की नकारात्मक वातावरण वाली चुनौती के बीच भी दीपा ने समाज का उनके प्रति कभी न सफल होने वाले नजरिए को मात देने का काम किया।  

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