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पराली जलाने से फिर न होने लगे घुटन, समय रहते उठाइए कदम; पंजाब सरकार को निर्देश

पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान के खेतों से उठने वाला धुआं NCR में स्मॉग जैकेट बनाता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा होते हैं। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर खूब हंगामा खड़ा होता है।

पराली जलाने से फिर न होने लगे घुटन, समय रहते उठाइए कदम; पंजाब सरकार को निर्देश
Niteesh Kumarगुरप्रीत सिंह निब्बर, हिन्दुस्तान टाइम्स,चंडीगढ़Tue, 11 Jun 2024 10:55 PM
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केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पंजाब से अक्टूबर-नवंबर में कटाई के दौरान पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए अभी से कदम उठाने का कहा है। नई दिल्ली में कृषि सचिव मनोज आहूजा और विशेष मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के नेतृत्व में पंजाब के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इसमें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एसएस गोसल भी शामिल हुए। इस दौरान राज्य को पराली की समस्या को लेकर योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। मालूम हो कि पराली जलाना सर्दियों की शुरुआत में वायु प्रदूषण का प्रमुख कारक रहा है।

पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान के खेतों से उठने वाला धुआं NCR में स्मॉग जैकेट बनाता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा होते हैं। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर खूब हंगामा खड़ा होता है और लोग पराली जलाने पर रोकथाम के प्रयासों को तेज करने की मांग करते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो धान की कटाई के दौरान करीब 20 मिलियन टन धान की पराली उत्पन्न होती है। इसमें प्रीमियम बासमती किस्म की 3.3 मिलियन टन पराली भी शामिल है। कुल पराली में से राज्य सरकार विभिन्न इन-सीटू मैनेजमेंट से लगभग 11.5 मिलियन टन और एक्स-सीटू विधि से 4.67 मिलियन टन का प्रबंधन करती है।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 26% की गिरावट
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) और पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) की ओर से कुछ आंकड़ों जारी किए गए हैं। इसके अनुसार, पिछले सीजन में पंजाब में पराली जलाने की कुल घटनाओं में 26 फीसदी की गिरावट आई थी। 2022 में कुल 49,922 खेतों में आग लगने की घटनाएं हुईं। इसके मुकाबले पिछले साल यह संख्या घटकर 36,623 पर आ गई। हालांकि, पराली जलाने का क्षेत्र 2022 में 15 लाख एकड़ के मुकाबले 2023 में बढ़कर 19 लाख एकड़ हो गया। पीएयू के कुलपति गोसल ने बताया कि चावल की किस्मों को लेकर रिसर्च जारी है। इसे ध्यान में रखते हुए फिलीपींस स्थित अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के एक्सपर्ट्स भी बैठक का शामिल हुए थे।