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उमर खालिद के वकीलों को पता था फैसला, इसलिए वापस ले ली जमानत याचिका; बोले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज

पूर्व जज लोकुर ने उमर खालिद द्वारा सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस लेने का भी जिक्र किया और कहा, ''आपके पास उमर खालिद द्वारा जमानत मांगने का मामला है, जो लंबे समय से लिस्ट नहीं हुआ है।''

उमर खालिद के वकीलों को पता था फैसला, इसलिए वापस ले ली जमानत याचिका; बोले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 24 Feb 2024 08:37 PM
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मदन बी लोकुर ने शनिवार को एक कार्यक्रम में दावा किया कि दिल्ली दंगों में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के वकील पहले से ही जानते थे कि जमानत याचिका पर क्या फैसला आएगा, इसीलिए उन्होंने याचिका को वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि यह धारणा बन चुकी है कि जब कोई मामला विशेष बेंच के सामने जाएगा, तो परिणाम क्या होगा। बता दें कि कुछ दिन पहले उमर खालिद ने जमानत याचिका को वापस ले लिया था। खालिद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बेंच को बताया था कि परिस्थितियां बदल गई हैं और ट्रायल कोर्ट के सामने नए सिरे से जमानत मांगने की कोशिश होगी।

'लाइव लॉ' की रिपोर्ट के अनुसार, कैम्पेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) द्वारा दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में रिटायर्ड जस्टिस मदन बी लोकुर ने मास्टर ऑफ रोस्टर प्रणाली में अस्पष्टता के खिलाफ बातें कीं। इस दौरान  जस्टिस लोकुर ने उमर खालिद द्वारा सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस लेने का भी जिक्र किया और कहा, ''आपके पास उमर खालिद द्वारा जमानत मांगने का मामला है, जो लंबे समय से लिस्ट नहीं हुआ है। इसमें 13 बार स्थगन हो चुका है। आखिरकार, वकील ने यह कह दिया कि हम मामले को वापस लेना चाहते हैं। ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वे जानते थे कि फैसला क्या आने वाला है। वे उस मामले का भाग्य जानते थे।''

सुप्रीम कोर्ट में मामलों की लिस्टिंग को लेकर भी पूर्व जस्टिस ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह कोई नहीं बात नहीं है, जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है। उन्होंने उस समय को याद किया जब वह शीर्ष अदालत में वकील थे और वकील रजिस्ट्री के एक सदस्य को यह बताने के लिए मुख्य न्यायाधीश की अदालत में इकट्ठा होते थे कि वे चाहते हैं कि उनका मामला एक विशेष तारीख पर सूचीबद्ध हो। उन्होंने कहा, ''हम इसे मछली बाजार कहते थे क्योंकि हर कोई उस तारीख को पाने की कोशिश कर रहा था।'' पूर्व न्यायाधीश ने आगे याद दिलाया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश भगवती ने लिस्टिंग प्रोफार्मा की प्रणाली शुरू की थी।

बता दें कि जस्टिस लोकुर चार जून 2012 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और फिर 31 दिसंबर, 2018 में रिटायर हुए। इसके अलावा, वे गुवाहाटी हाई कोर्ट और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके थे। अगस्त 2019 में, उन्होंने फिजी के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। तब ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी भारतीय न्यायाधीश को किसी अन्य देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। 

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