यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग को लेकर क्षत्रिय महासभा का धरना
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं सवर्ण समाज ने यूजीसी नए कानून के खिलाफ एक दिवसीय धरना दिया। धरनार्थियों ने केंद्र सरकार से कानून को वापस लेने और समान अवसर हेतु 06 सूत्री मांगों का समर्थन किया। वक्ताओं ने आर्थिक एवं सामाजिक पिछड़ेपन की समीक्षा एवं जाति आधारित अनुचित नंदभाव को रोकने की आवश्यकता जताई।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं सवर्ण समाज ने संयुक्त रूप से गुरुवार को नगर के गांधी चौक पर यूजीसी नए कानून के खिलाफ एक दिवसीय धरना दिया। कानून के खिलाफ प्रतिरोध जताते हुए इसे केंद्र सरकार से शीघ्र वापस लेने सहित 06 सूत्री मांगों के समर्थन में विरोध प्रकट किया। धरनार्थियों ने क्षत्रिय महासभा के पूर्व युवा प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक कुमार के नेतृत्व में अपनी मांगों का ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौंपा।
धरना सभा के विचार
धरना में डॉ. दामोदर प्रसाद सिंह सिंह मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। धरना सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि समानता सामाजिक न्याय, योग्यता एवं प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्रदान करने के सवैधानिक सिद्धांतों के समर्थन विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। वर्तमान आरक्षण बावस्था की व्यापक एवं निश्यक्ष समीक्षा की जाए तथा यह सुनिश्थित किया जाए कि सरकारी नौकरियों शैक्षणिक सख्यानी एक अन्य अवसरों में बास्तविक रूप से आर्थिक एवं सामाजिक रूप से बचित व्यक्तियों को प्रभागी सहायता प्राप्त हो।
मांगें एवं विचार-विमर्श
इस संबंध में आर्थिक स्थिति को एक महत्वपूर्ण एवं वस्तुनिष्ठ मानदह के रूप में अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया जाना बाहिए। विश्वविद्याल ने एवं अन्य शैक्षणिक परिसरों में ऐसी किसी भी नीति अथवा व्यवस्था की समीक्षा एवं आवश्यक संशोधन वापसी की मांग की गई।
इसके अलावा धरनार्थियों की मांगों मेंआर्थिक एवं बास्तविक सामाजिक आर्थिक पिछडेपन को अवसरों एवं कल्याणकारी नीतियोमें उचित महत्व देने पर विचार करने,शैक्षणिक परिसरों में जाति के आधार पर किसी भी अनुचित नंदभाव को रोकने हेतु प्रभावी, यूजीसी एवं सबंधित शैक्षणिक प्राधिकरणों की ऐसी नीतियों की समीक्षा की करने आदि शामिल है। धरना सभा मे रामानंद सिंह,गणेश प्रसाद सिंह,पवन कुमार,मणिभूषण और मुकेश सहित दर्जनों वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त है। -अमिताभ सिंह


