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दक्षिण के ये दो राज्य न देते साथ तो और खराब होती NDA की हालत, कैसे बचा ली लाज

अगर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना एनडीए का साथ नहीं देते तो चुनाव में लाज बचानी मुश्किल हो जाती और हार का खतरा भी था। इन दोनों राज्यों से एनडीए को 42 में से 29 सीट मिलीं।

दक्षिण के ये दो राज्य न देते साथ तो और खराब होती NDA की हालत, कैसे बचा ली लाज
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 05 Jun 2024 01:29 PM
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लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों में एक बार फिर एनडीए की लहर देखने को मिली। 292 सीटों के साथ भाजपा गठबंधन वाली एनडीए सरकार बनाने जा रही है। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए की जीत का रास्ता उत्तर नहीं दक्षिण से निकला। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि अगर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना एनडीए का साथ नहीं देते तो चुनाव में लाज बचानी मुश्किल हो जाती और हार का खतरा भी था।इन दोनों राज्यों से एनडीए को 42 में से 29 सीट मिलीं। जबकि, 2019 में इन राज्यों में एनडीए की जीत का आंकड़ा सिर्फ चार सीट था।

आंध्र प्रदेश में टीडीपी सिकंदर
आंध्र प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों चौंकाने वाले रहे। विधानसभा चुनाव में टीडीपी को 135, जेएनपी को 21 और भाजपा को 8 सीटें मिलीं। वहीं, वाईएसआर कांग्रेस को सिर्फ 11 सीट मिली। जगन रेड्डी की सरकार गिर गई है और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी पूर्व बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।

आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो यहां टीडीपी ने सर्वाधिक 16 सीट हासिल की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल 25 सीटों पर हुए मतदान में भाजपा 6 सीटों पर चुनाव लड़ी और तीन जीतने में कामयाब रही। वहीं, अभिनेता-राजनेता पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ने दो सीटें जीतीं। इस तरह यहां एनडीए को 21 सीट मिली। बाकी 4 सीट वाईएसआर कांग्रेस के खाते में आई।

कांग्रेस का बेहद बुरा प्रदर्शन
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। 2019 के प्रदर्शन को रिपीट करते हुए कांग्रेस पार्टी इस बार भी यहां खाता खोलने में नाकाम रही। हालाँकि, तेलंगाना में भाजपा और कांग्रेस के बीच टाइट फाइट दिखी। दोनों दलों ने आठ-आठ सीटें जीतीं। कुल 17 लोकसभा सीटों वाले तेलंगाना राज्य में एआईएमआईएम के खाते में इकलौती हैदराबाद सीट आई। यहां से असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा की स्टार लीडर माधवी लता को करारी शिकस्त दी। तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस का खाता तक नहीं खुला।

तेलंगाना में फेल रही कांग्रेस-बीआरएस
तेंलगाना में इस वक्त कांग्रेस पार्टी की सरकार है। पिछले साल ही दिसंबर महीने में कांग्रेस पार्टी ने 119 सीटों में से 65 सीट जीतकर बहुमत हासिल किया था। हालांकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उतना कमाल प्रदर्शन नहीं कर सकी। इस दक्षिण भारतीय राज्य में भाजपा मोदी फैक्टर की उम्मीद कर रही थी और यह कुछ हद तक काम भी कर गई। उधर, केसीआर की बीआरएस ने 2019 के चुनावों में 17 में से नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार खाता तक खोलने में नाकाम रही। 

ओवैसी के आगे नहीं चला माधवी लता का जादू
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा हैदराबाद की सीट पर ओवैसी को हराने का दावा कर रही थी। हालांकि ऐसा नहीं हो पाया। एआईएमआईएम ने अपनी एकमात्र लोकसभा सीट बरकरार रखी है। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में भाजपा की उम्मीदवार माधवी लता को करारी शिकस्त दी। ओवैसी ने 2004 से लगातार हैदराबाद का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि, राज्य में एक भी सीट जीतने में विफल रही। भाजपा के दिग्गज नेताओं की बात करें तो तेलंगाना अध्यक्ष बंदी संजय कुमार दूसरी बार अपनी सीट करीमनगर से जीते। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने भी अपनी सीट सिकंदराबाद सीट बचा ली।