प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर
खोरीमहुआ के खटौरी पंचायत सचिवालय में 12-13 जुलाई 2026 को प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भर गांवों पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में किसानों को जैविक खेती की तकनीकें, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और लागत कम करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बताया।

खोरीमहुआ। हीरोडीह थाना क्षेत्र के खटौरी पंचायत सचिवालय में 12 एवं 13 जुलाई 2026 को प्राकृतिक खेती, स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं आत्मनिर्भर गांव विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर दिया गया। कार्यशाला पीस फाउंडेशन एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यशाला में पंचायत के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और प्राकृतिक एवं जैविक खेती की कम लागत वाली तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, खेती की लागत घटाना और बाजार पर निर्भरता कम कर गांवों को आत्मनिर्भर बनाना था।
विशेषज्ञों ने जैविक खाद-कीटनाशक निर्माण, कम लागत वाली कृषि तकनीक, सामुदायिक सहयोग और टिकाऊ खेती पर जानकारी दी। बताया गया कि रासायनिक खेती पर निर्भरता घटाकर स्थानीय संसाधनों से उत्पादन लागत कम की जा सकती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि होगी। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम है। कार्यक्रम में पीस फाउंडेशन के सचिव अरुण कुमार, भारत ज्ञान विज्ञान समिति से विश्वनाथ सिंह, रवि सिंह, किशोर मुर्मू, दिमोल मरांडी, पूर्व मुखिया नवीन मुर्मू, पंचायत सचिव दशरथ प्रसाद सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने और प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया।


