गैंगस्टर एक्ट के दो दोषियों की तीन साल की कैद
बांदा में गिरोहबंद एवं समाजविरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत दो दोषियों को 3-3 वर्ष की कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी गई। इन दोनों पर संगठित अपराध करने का आरोप था, जिनके विरुद्ध कोई गवाह नहीं था। विशेष न्यायाधीश ने आधारभूत साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई।

बांदा। उप्र गिरोहबंद एवं समाजविरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के मामले मे दो दोषियों को विशेष न्यायाधीश गैगेस्टर एक्ट श्रीपाल सिंह की अदालत ने 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा व 5-5 हजार रूपयें के जुर्माने से दंडित किया।अर्थदंड की धनराशि जमा न करने पर 1-1 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि बदौसा थाना क्षेत्र के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राजीव यादव ने 2 जून 2015 को थाने मे मुकदमा दर्ज कराया कि इन दोनो दोषी कमलेश पुत्र गामा सिंह व चुनूबाद पुत्र रामदयाल का एक संगठित गिरोह था।जिसका सरगना सन्नों सिंह था। जिसकी दौरान मुकदमा मृत्यु हों गयी।
इन तीनों के विरूद्व अपराधिक मुकदमें पंजीकृत थे।यह संगठित होकर अपराध कर अपने आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए धन अर्जित करते थे। उनके विरूद्व कोई जनता का गवाह गवाही देने को तैयार नही था।अपराधिक इतिहास के आधार पर इन तीनों के विरूद्व तत्कालीन विवेचक शिवसागर पाडेंय ने गैंग चार्ट बनाकर जिलाधिकारी से अनुमोदित कराकर आरोप पत्र न्यायालय मे पेश किया।मामले की सुनवाई के दौरान 12 फरवरी 2016 को इन तीनों के विरूद्व आरोप बनाया गया।इस मामले मे अभियोजन की ओर से 6 गवाह पेश किए गए।पत्रावली मे उपलब्ध साक्ष्यों व अधिवक्ताओं की दलीले सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपने 29 पृष्ठीय फैसले मे कमलेश व चुनूबाद को दोषी पाकर सजा व जुर्माने से दंडित किया।


