खेल : जो गोपी नहीं कर पाए वो बेटी गायत्री ने कर दिखाया
त्रीसा-गायत्री की जोड़ी ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में सेमीफाइनल में चैंपियन लियू-निंग को कड़ी टक्कर दी। भारतीय महिला युगल जोड़ी ने कांस्य पदक के साथ भारतीय अभियान खत्म किया। गायत्री ने अपने पिता गोपीचंद का सपना पूरा किया। अन्य वर्गों में भारतीय खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ पाए।

शोल्डर : त्रीसा-गायत्री की जोड़ी ने सेमीफाइनल में चैंपियन लियू-निंग को दी कड़ी टक्कर, महिला युगल जोड़ी की पराजय के साथ चैंपियनशिप में एक कांस्य पदक के साथ भारतीय अभियान खत्म हिन्दुस्तान ब्यूरो, नई दिल्ली। पुलेला गोपीचंद ने ऑल इंग्लैंड सहित कई प्रतिष्ठित पदक जीते। साथ ही देश को साइना, सिंधु, श्रीकांत और प्रणय जैसे नई पीढ़ी के खिलाड़ी भी दिए। पर अपने खेल जीवन में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में पदक जीतने की हसरत कभी पूरी नहीं कर पाए। पर उनकी बिटिया गायत्री गोपीचंद ने शनिवार को विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतकर पिता के अधूरे सपने को भी पूरा कर दिया。
जोड़ीदार त्रीसा जॉली के साथ मिलकर
उन्होंने भारतीय महिला युगल बैडमिंटन का नया अध्याय भी लिख दिया। खचाखच भरे इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में त्रीसा-गायत्री और 'जीतेगा भई जीतेगा इंडिया जीतेगा' के नारों के बीच भारतीय जोड़ी शीर्ष वरीय चीनी जोड़ी से लड़कर हर गईं लेकिन अपने खेल से सबसे दिल जीत लिया। गैर वरीयता प्राप्त त्रीसा-गायत्री को एक घंटे 11 मिनट तक चले मुकाबले में गत चैंपियन और ओलंपिक की रजत पदक विजेता लियू शेंग शू और टैन निंग के हाथों 21-18, 13-21, 8-21 से हार झेलनी पड़ी। चीनी जोड़ी के खिलाफ पिछले सात मुकाबलों में त्रीसा-गायत्री की यह छठी हार है।
ज्वाला-अश्विनी के क्लब में
त्रीसा-गायत्री पिछले 15 साल में महिला युगल में पदक जीतने वाली पहली जबकि कुल दूसरी भारतीय जोड़ी बनी। यह दोनों ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा (2011 लंदन) के क्लब में शामिल हो गईं।
क्रॉस-कोर्ट शॉट का कमाल
भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक शुरुआत की और 7-2 की बढ़त बना ली। चीनी जोड़ी ने लगातार छह अंक लेकर वापसी की और ब्रेक तक 11-7 से आगे हो गईं। भारतीय जोड़ी ने स्कोर 12-12 से बराबर कर दिया। त्रीसा के शानदार क्रॉस-कोर्ट शॉट और आक्रामक खेल की मदद से स्कोर 18-18 होने हो गया। त्रीसा ने एक शानदार शॉट लगाया और भारत 19-18 से आगे हो गया। इसके बाद भारतीय जोड़ी ने लगातार दो अंक लेकर पहला गेम 21-18 से जीत लिया।
नहीं दिया मौका
दूसरे गेम में चीन की जोड़ी ने 3-0 की बढ़त से शुरुआत की। त्रीसा-गायत्री ने वापसी कर स्कोर 10-10 से बराबर करने के बाद कुछ समय के लिए बढ़त भी बनाई। इसके बाद लियू-निंग ने कोई मौका नहीं दिया। भारतीय खिलाड़ियों की गलतियों का फायदा उठाते हुए 17-12, फिर 19-12 और फिर 21-13 से जीतकर मुकाबला निर्णायक तीसरे गेम में पहुंचा दिया।
56 शॉट की रैली
तीसरे गेम की शुरुआत में दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। भारतीय जोड़ी ने एक लंबी 56 शॉट की रैली जीतकर स्कोर 2-2 किया। चीनी जोड़ी ने खेल की गति बदली और धीरे-धीरे बढ़त बनानी शुरू की और ब्रेक तक इसे 11-5 कर दिया। इसके बाद भारतीय जोड़ी सिर्फ तीन अंक जुटा पाई और अंत में लियू-निंग ने क्रॉस-कोर्ट शॉट के साथ गेम और मैच 21-8 से जीत लिया।
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बनाई अलग पहचान
गायत्री ने पिता गोपीचंद ने अपनी अलग पहचान बनाई। लोग हमेशा कहते थे उसे सब कुछ आसानी से मिला है। इस उपलब्धि से उसे यह संतोष भी मिलेगा कि वह विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता है। उसके करियर में यह बहुत बड़ा पदक होगा।
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बिटियों ने बचाई लाज
त्रीसा-गायत्री की सेमीफाइनल में हार के साथ ही चैंपियनशिप में भारतीय अभियान खत्म हो गया। 17 साल बाद देश में हुई चैंपियनशिप में भारत ने पांचों वर्ग में दो-दो खिलाड़ी उतारे लेकिन महिला युगल को छोड़कर अन्य कोई भी क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ पाया। त्रीसा-गायत्री ने कांसे के साथ पिछले लगातार 15 साल से पदक जीतने का सिलसिला बरकरार रखकर भारत की लाज बचाई।
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