साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का 90 वर्ष की आयु में निधन
प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को भोपाल में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पंत ने हिंदी साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को भदभदा विश्राम घाट पर होगा।

प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को भोपाल में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवार ने निधन की जानकारी देते हुए बताया कि पंत बीते कुछ समय से अस्वस्थ थे। शुक्रवार सुबह हृदयगति रूकने से उनका निधन हो गया। साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत के भाई चंद्रशेखर पंत ने शोक संदेश में कहा, मेरे अनुज और प्रीति, निवेदिता व अदिति के पिता तथा हिंदी भवन भोपाल के पूर्व मंत्री संचालक कैलाश चंद्र पंत 'दादा' का प्रभु-मिलन हो गया है। उन्होंने बताया कि पंत का अंतिम संस्कार शनिवार को भदभदा विश्राम घाट पर होगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैलाश चंद्र पंत के निधन पर शोक जताया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में पंत जी लंबे समय तक सक्रिय रहे। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
उत्तराखंड के बागेश्वर से नाता
पंत मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के खंतोली गांव के रहने वाले थे। पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के महू में हुआ था। उनके पिता लीलाधर पंत तथा माता हरिप्रिया पंत का रोजगार के सिलसिले में मध्यप्रदेश में बस गए थे। पंत ने इंदौर स्थित यूनियन थियोलाजिकल सेमिनरी में व्याख्याता के रूप में सेवाएं दीं और फिर भोपाल में पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य के रूप में काम किया। वह 'शिक्षा प्रदीप', 'जनधर्म', 'दूरगामी आह्वान' जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादक भी रहे।
इसी साल मिला था पद्मश्री
हिंदी साहित्य में योगदान के लिए उन्हें इसी साल पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। हिंदी भवन, भोपाल में संचालक रहे पंत ने भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति सहित अनेक संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। प्रमुख पुस्तकों में 'कौन किसका आदमी', 'धुंध के आर-पार', 'शब्द का विचार-पथ' तथा 'शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा' शामिल हैं। पंत को साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान, संस्कृति गौरव सम्मान मिला था।


