मानव कल्याण की भावना से भरे थे शास्त्रीजी
वाराणसी में आयोजित गोष्ठी में साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने लालबहादुर शास्त्री को मानव कल्याण और विश्व शांति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि उनका प्रधानमंत्रित्व काल भारतीय राजनीति का टर्निंग प्वाइंट था। राजनीति में उनकी ईमानदारी और सादगी एक प्रेरणा बनकर आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
वाराणसी, संवाददाता। लालबहादुर शास्त्री एक ऐसे महापुरुष थे जो एक ओर मानव कल्याण और विश्व शांति की भावना से भरे थे, वहीं युद्ध थोपे जाने की स्थिति में शत्रुओं की भूमि में हुंकार भरते हुए उन्हें आत्म समर्पण करने पर विवश कर दिया था। उनका मात्र 18 महीनों का प्रधानमंत्रित्व काल भारतीय राजनीति का टर्निंग प्वाइट था। वह आज भी ईमानदार राजनीति करने वाले के लिए प्रेरणा का विषय है। ये बातें साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहीं। वह भारतीय जन जागरण समिति के तत्वावधान में रविवार को सारनाथ में न्यू सारनाथ गैलरी में आयोजित गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
‘कल आज और कल’ विषयक गोष्ठी में उन्होंने कहा कि शास्त्रीजी को किसी पार्टी विशेष के नेता के रूप में नहीं देखना चाहिए। अपनी ईमानदार छवि और सादगी के कारण वह भारत के जन-जन के मन में हमेश बसे रहेंगे। डॉ. कुमुद रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि राजनीति में शास्त्रीजी की सादगी स्थापित करना काफी कठिन है।सूबेदार रामजनम सिंह ने कहा कि राजनीति में जनता की भावनाओं के साथ खेलना आम बात है। समिति की महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष कुमकुम श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान राजनीति दूषित हो चुकी है। एमएलसी प्रत्याशी डॉ. बेनीमाधव ने कहा कि शास्त्री जी के संकल्पों, आचरण और राजनीति में सुचिता स्थापित करना अनिवार्य है। धीरेंद्र श्रीवास्तव, कवींद्र नारायण, बृजेश पांडेय, कृष्ण कुमार, शिखा श्रीवास्तव, बागेश्वरी, दिनेश, सरिता श्रीवास्तव, विनोद, शेखर, संजय, सौरभ आदि ने भी विचार व्यक्त किए। स्वागत आनंद चौबे, संचालन मनोज श्रीवास्तव एवं धन्यवाद ज्ञापन अशोक श्रीवास्तव ने किया।


