जिनकी शहादत से सुरक्षित है हमारा आज

हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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अलीगढ़ के वीर जवान प्रेमपाल सिंह की शहादत की याद में उनकी माता 27 वर्षों से प्रतिमा के पास भोजन अर्पित कर रही हैं। कारगिल विजय दिवस पर शहीदों के परिजनों ने बताया कि कई विकास कार्य अब तक अधूरे हैं। शहीद चौधरी प्रवीण सिंह का परिवार भी उनके बलिदान को गर्व से याद कर रहा है।

जिनकी शहादत से सुरक्षित है हमारा आज

शहीदों की चिताओ पर हर बरस लगेंगे मेले, वतन पर मिटने वालों का बस यहीं आखिरी निशां होगा..शहीदों के सम्मान में अक्सर इन पंक्तियों का प्रयोग तमाम मंचों से होता रहा, लेकिन अलीगढ़ के जिन जाबांज सपूतों ने अपनी शहादत थी। आज उनके परिवार पर यह पंक्तियां उल्टी साबित हो रही हैं। न शहीदों की चिताओं पर मेले हैं और आखिरी निशां भी मिटता जा रहा है। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर हिन्दुस्तान ने कारगिल युद्ध में शहीद हुए जाबांजों के परिजनों से बात की। n पिछले 27 वर्षों से शहीद प्रेमपाल की प्रतिमा के पास भोजन परोसती हैं वीरमति

शहीद प्रेमपाल की माता का अनूठा ट्रिब्यूट

n सिरहाने पानी रखने और बिस्तर लगाने की परंपरा को भी जीवित रखा है

n यह एक मां का मिलिट्री ट्रिब्यूट है, जिसने शहीद को अलीगढ़ मिट्टी से दूर नहीं होने दिया

अलीगढ़, संवाददाता। इगलास तहसील के गांव खैमका वास गांव के वीर जवान प्रेमपाल सिंह की शहादत की याद में आज भी उनकी माता उनके सम्मान में प्रतिमा के पास भोजन अर्पित करती हैं।

शहीद का परिवार आज भी भावनात्मक रूप से शहीद प्रेमपाल को अपने बीच जीवित मानता है। उनकी बुजुर्ग माता वीरमति देवी ने पिछले 27 वर्षों से एक अनूठी परंपरा कायम रखी है। वह रोज अपने बेटे की प्रतिमा के पास भोजन की थाली परोसती हैं, सिरहाने पानी रखती हैं और उनका बिस्तर लगाती हैं। उनका मानना है कि देश पर मर मिटने वाले कभी मरते नहीं हैं। प्रेमपाल सिंह मात्र 19 वर्ष की आयु में 9 महार रेजिमेंट का हिस्सा बनकर कारगिल की बर्फीली चोटियों पर लड़े थे। प्रेमपाल का जन्म 16 दिसंबर 1979 को हुआ था और ठीक 19 साल बाद वे देश के काम आ गए। उनकी माँ वीरमती देवी ने पिछले 27 वर्षों से अपने घर के कोने में बनी प्रेमपाल की प्रतिमा के पास रोजाना ताजे भोजन की थाली परोसने, सिरहाने पानी रखने और बिस्तर लगाने की एक अनूठी परंपरा को जीवित रखा है। यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक माँ का मिलिट्री ट्रिब्यूट है, जो यह साबित करता है कि अलीगढ़ का यह लाल अपनी मिट्टी से कभी दूर नहीं गया।

27 साल बाद भी वादे पूरे होेने का इंतजार

अतरौली संवाददाता। कारगिल युद्ध के वीर शहीदों की शहादत को देश कभी नहीं भूल सकता, लेकिन कई स्थानों पर शहीदों की याद में किए गए विकास कार्य और घोषणाएं आज भी अधूरी हैं। कारगिल विजय की 27वीं वर्षगांठ पर लोगों ने कहा कि शहीदों के सम्मान में किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हो सके हैं।

अतरौली के राज गांव में शाहिद सूबेदार राजवीर सिंह की पत्नी रामवती देवी का कहना है कि 27 वर्ष पहले शहीद सूबेदार राजवीर सिंह की स्मृति में स्मृति द्वार और भव्य स्मृति प्रेरणा स्थल के साथ तमाम विकास कार्यों की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक उनका निर्माण पूरा नहीं हो पाया। गाँव मे स्थापित सूबेदार जी की प्रतिमा के आस पास गन्दगी रहती है। ठीक से साफ सफाई भी नहीं होती हम और परिवार के लोग ही प्रतिमा और पार्क की सफाई करते है। हमें और क्षेत्रवासियों में इस बात से निराशा है।

उनका कहना है कि शहीदों का सम्मान केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए घोषित योजनाओं को समय पर पूरा किया जाना चाहिए। कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर ग्रामीणों और युवाओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सरकार और प्रशासन से लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कराने की मांग की।

अमर शहीद चौधरी प्रवीण सिंह की याद में गर्व

छर्रा, संवाददाता। कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद चौधरी प्रवीण सिंह आज भी ग्रामीणों के दिलों में अमर हैं। देशसेवा के लिए समर्पित उनका परिवार आज भी इस गौरवशाली परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहा है। चार भाइयों में दूसरे नंबर के शहीद प्रवीण सिंह के पिता देवकरन सिंह (85 वर्ष) स्वयं सीआरपीएफ में दरोगा रह चुके हैं। उनके सबसे छोटे भाई विषन चौधरी वर्तमान में भारतीय सेना में सूबेदार हैं, जबकि अन्य दो भाई इंद्रजीत सिंह और अर्जुन सिंह गांव में ही रहकर खेती और गैस एजेंसी का संचालन कर रहे हैं। शहीद की माता विर्मा देवी और पत्नी पिंकी चौधरी हैं। उनके परिवार में दो बेटियां (उमा व निशा) और दो बेटे (मनोज व अनुज) हैं।गांव में शहीद की स्मृति में एक भव्य स्मारक और प्रतिमा स्थापित है, जिसे ग्रामीण मंदिर की तरह पूजते हैं। इस गांव का देशसेवा से गहरा नाता है। वर्तमान में रिंकू, भोली, विजयपाल, राहुल और विनोद सहित करीब एक दर्जन जवान सेना में तैनात हैं। इसके अलावा पांच पुलिसकर्मी और दो पीएसी के जवान भी सेवाएं दे रहे हैं। ग्रामीण गजेंद्र सिंह चौधरी कहते हैं कि प्रवीण सिंह का बलिदान पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

FAQs

✦27 वर्षों से शहीद प्रेमपाल की माता कौन सी परंपरा निभा रही हैं?−
उन्होंने प्रतिमा के पास भोजन परोसने, सिरहाने पानी रखने और बिस्तर लगाने की परंपरा निभाई है।
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