स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विचार गोष्ठी का आयोजन
नई दिल्ली में अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी परिवार संघ द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। डॉ. जे. पी. सिंह साहनी ने स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान और पहचान न मिलने की चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हमें उनकी विरासत और बलिदानों को अगली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए।

नई दिल्ली। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी परिवार संघ द्वारा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने, स्वतंत्रता सेनानी कॉमरेड सरदार गुरचरण सिंह लाधुपुर जी एवं स्वतंत्रता सेनानी डॉ. इकबाल सिंह साहनी जी की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में एक गरिमामय श्रद्धांजलि समारोह एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य विषय थ, एक सोच, 75 साल होने को आए, कैसा भारत ये चाहते थे? स्वतंत्रता सेनानियों के सपने और 75 वर्षों बाद भारत का राजनीतिक परिदृश्य। इस अवसर पर विश्व विख्यात शिक्षाविद् एवं मीडिया जगत की प्रतिष्ठित हस्ती डॉ. संदीप मारवाह विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं देशभर से आए अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने सहभागिता की。
स्वतंत्रता सेनानियों को मिले उचित सम्मान: डॉ. जे. पी. सिंह साहनी
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जे. पी. सिंह साहनी ने अपने संबोधन में भारत के वास्तविक स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके परिवारों को पर्याप्त सम्मान और पहचान न मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज देश में अनेक सड़कें, संस्थान एवं सार्वजनिक स्थल खिलाड़ियों, फिल्मी हस्तियों और अन्य लोकप्रिय व्यक्तियों के नाम पर बनाए जा रहे हैं। जबकि जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर भारत को आजादी दिलाई, उनके नाम और उनके परिवारों को वह सम्मान नहीं मिल पाया जिसके वे वास्तविक अधिकारी हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिन वीरों ने अपना सर्वस्व त्यागकर हमें स्वतंत्र भारत दिया, उन्हीं की बदौलत आज हमारी राष्ट्रीय पहचान है। हमें स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि क्या यही वह भारत है जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था? आज आवश्यकता इस बात की है कि उनके त्याग, बलिदान और आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक सम्मानपूर्वक पहुँचाया जाए तथा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान मिले। डॉ. साहनी ने देश के समक्ष उपस्थित अनेक गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और कहा कि इन विषयों पर व्यापक राष्ट्रीय चर्चा एवं प्रभावी नीति निर्माण की अत्यंत आवश्यकता है।


