छात्र संघ ने परिसीमन में एसटी सीटों की कटौती का किया विरोध
रांची में आदिवासी छात्र संघ ने परिसीमन के दौरान एसटी आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में कटौती और जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड की अनुपस्थिति के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। संघ ने सांसद आदित्य प्रसाद साहू से ज्ञापन सौंपा, जिसमें जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व कम करने का विरोध किया गया।

रांची, विशेष संवाददाता। आदिवासी छात्र संघ ने झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन के दौरान एसटी के आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की कटौती और आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड लागू नहीं किए जाने पर सड़क से सदन तक राज्यव्यापी व देशव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। शुक्रवार को केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव के नेतृत्व में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा सांसद व झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू से उनके ओरमांझी स्थित आवास पर मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। सुशील उरांव ने कहा कि झारखंड का गठन आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए हुए लंबे संघर्ष का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ वर्तमान जनसंख्या के आधार पर एसटी आरक्षित सीटों में कटौती संविधान की पाँचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम की भावना के विपरीत होगी। वहीं, मनोज उरांव ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज विस्थापन, अनियंत्रित प्रवास और भूमि अतिक्रमण के कारण जनसांख्यिकीय असंतुलन का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस कृत्रिम बदलाव को परिसीमन का आधार बनाकर आदिवासी प्रतिनिधित्व कम करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।संघ के केंद्रीय कोषाध्यक्ष डॉ जलेश्वर भगत ने आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि इससे आदिवासी समाज की वास्तविक जनसंख्या और सांस्कृतिक पहचान का सही आकलन संभव होगा। ज्ञापन में वर्तमान 28 एसटी आरक्षित विधानसभा सीटों व सभी आरक्षित लोकसभा सीटों को सुरक्षित रखने, 1971 की जनगणना आधारित संवैधानिक संतुलन बनाए रखने, सरना धर्म कोड लागू करने तथा आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जे हटाने की मांग की गई। सांसद आदित्य प्रसाद साहू ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इन मांगों को केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएंगे।


