राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की बैठक में बड़ा फैसला- 15 करोड़ लिखेंगे आदिवासी धर्म कोड
आदिवासी संगठनों ने जनगणना में अलग आदिवासी धर्म कॉलम की मांग को लेकर आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। 29-30 अगस्त को हुई बैठक में तय किया गया कि देश के 15 करोड़ आदिवासी 'आदिवासी धर्म' लिखेंगे। सभी राज्यों से प्रतिनिधियों के नाम मांगे गए हैं और कोर कमेटी गठित की जाएगी।

रांची, वरीय संवाददाता। जनगणना में अलग आदिवासी धर्म कॉलम की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों ने अब आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। नई दिल्ली के आंबेडकर भवन में 29 और 30 अगस्त को हुई राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति भारत की कोर कमेटी की बैठक में तय किया गया कि आगामी जनगणना में देश के करीब 15 करोड़ आदिवासी ‘आदिवासी धर्म’ लिखेंगे। इसके लिए देशभर में अभियान चलाने के साथ आंदोलन की रणनीति भी तैयार की गई। पूर्व मंत्री देव कुमार धान की अध्यक्षता में हुई बैठक में झारखंड, ओड़िशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और असम से आदिवासी समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, प्रेमशाही मुंडा, अभय भुट्ट, कुंवर चंदन, होनहागा, दिनेश भूमिज, अमरनाथ खरवार, गणेश पाट पिगुआ, गब्बर सिंह हेमरोम, मसूदी टुडू और सुलेमान हांसदा समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में संगठन के विस्तार और आंदोलन को मजबूत करने के लिए सभी राज्यों से विभिन्न आदिवासी समुदायों और संगठनों के 11-11 प्रतिनिधियों के नाम 7 सितंबर तक मांगे गए हैं। इसके बाद सभी जिलों में भी 30 सितंबर तक कोर कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया। संगठन ने तय किया कि कोर कमेटी के 75 फीसदी सदस्यों की मौजूदगी के बाद ही कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा।


